सरस्वती शिशु मंदिर कुम्हारी में मनाई गई मौसी लक्ष्मीबाई केलकर जयंती, अध्यक्ष निश्चय बाजपेई ने बताया राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान का महत्व

 सरस्वती शिशु मंदिर कुम्हारी में मनाई गई मौसी लक्ष्मीबाई केलकर जयंती, अध्यक्ष निश्चय बाजपेई ने बताया राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान का महत्व

संकल्प, संगठन और राष्ट्रसेवा के आदर्शों पर विद्यार्थियों को किया प्रेरित

कुम्हारी। सरस्वती शिशु मंदिर हाई स्कूल, कुम्हारी में राष्ट्र सेविका समिति की आद्य प्रमुख संचालिका मौसी लक्ष्मीबाई केलकर की जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष निश्चय बाजपेई ने उनके जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विस्तृत एवं प्रेरणादायी व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में निश्चय बाजपेई ने कहा कि भारत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना की भूमि है, जहां अनेक महान विभूतियों ने अपने जीवन और चरित्र से समाज को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने भी राष्ट्र के निर्माण और समाज जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनमें मौसी लक्ष्मीबाई केलकर का योगदान अत्यंत प्रेरणादायी है।

उन्होंने बताया कि 6 जुलाई 1905 (आषाढ़ शुक्ल दशमी) को नागपुर के राम मंदिर गली में जन्मी लक्ष्मीबाई केलकर का बचपन का नाम कमल था। उस समय महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी कठिन माना जाता था, लेकिन उन्होंने सामाजिक बंधनों को चुनौती देते हुए राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। स्वतंत्रता आंदोलन, भूदान आंदोलन और विशेष रूप से लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के प्रसिद्ध उद्घोष “स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर ही रहूंगा” से वे अत्यंत प्रभावित हुईं।निश्चय बाजपेई ने कहा कि इसी राष्ट्रभावना ने उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से मिलने के लिए प्रेरित किया। डॉ. हेडगेवार के मार्गदर्शन और सहयोग से वर्ष 1936 की विजयादशमी पर राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना हुई। उन्होंने बताया कि समिति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समान ध्येय, समान विचार और समान कार्यपद्धति के साथ समानांतर रूप से राष्ट्र निर्माण के कार्य में निरंतर सक्रिय हैं।उन्होंने कहा कि मौसी लक्ष्मीबाई केलकर ने अपने अदम्य संकल्प, संगठन क्षमता और समर्पण से यह सिद्ध किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति वाली महिला समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने की क्षमता रखती है। उनका संपूर्ण जीवन सेवा, संस्कार, संगठन और राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण है। आज भी राष्ट्र सेविका समिति की सेविकाएं उनके जन्मदिवस को “संकल्प दिवस” के रूप में मनाते हुए राष्ट्रसेवा के नए संकल्प लेती हैं।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को मौसी लक्ष्मीबाई केलकर के आदर्शों पर चलने, समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया गया। उपस्थित सभी विद्यार्थियों एवं नागरिकों ने पूरे ध्यान और उत्साह के साथ व्याख्यान को सुना।

कार्यक्रम के अंत में रामबिहारी मिश्रा ने सभी अतिथियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं, विद्यार्थियों एवं उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।