दुर्ग में नींद की गोलियां खाने से 7 छात्र बीमार, 4 का अस्पताल में उपचार जारी

स्कूल प्रबंधन ने की कार्रवाई, दवा उपलब्ध कराने वाले छात्र को टीसी देने का निर्णय

दुर्ग। शहर के नयापारा स्थित शासकीय चंद्रशेखर आजाद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में सात विद्यार्थियों के नींद की दवा सेवन करने का मामला सामने आया है। घटना के बाद सभी छात्रों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें उपचार के लिए विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनमें से चार छात्र अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, हालांकि चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति फिलहाल सामान्य और नियंत्रण में है।

कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्र प्रभावित

जानकारी के अनुसार प्रभावित विद्यार्थियों में कक्षा 9वीं के दो और कक्षा 10वीं के पांच छात्र शामिल हैं। बताया जा रहा है कि छात्रों ने “जिल्फोडीन” नामक टेबलेट का सेवन किया था। बीमार छात्रों ने पूछताछ के दौरान आरोप लगाया है कि यह दवा उन्हें स्कूल के ही एक छात्र द्वारा उपलब्ध कराई गई थी।

एक छात्र की तबीयत बिगड़ने से खुला मामला

विद्यालय की प्राचार्य नलिनी सिंह ने बताया कि 16 जुलाई को एक छात्र की अचानक तबीयत खराब हो गई थी। कक्षा में ही उसके मुंह से झाग निकलने लगा, जिसके बाद तत्काल परिजनों को सूचना देकर छात्र को अस्पताल भेजा गया। अगले दिन छह अन्य विद्यार्थियों की तबीयत खराब होने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई।

जांच के लिए रिपोर्ट तलब

घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग और स्कूल प्रशासन सक्रिय हो गया। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. विनोद शुक्ला ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए संबंधित विद्यालय से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

शाला विकास समिति ने लिया बड़ा निर्णय

घटना के बाद शाला विकास समिति की विशेष बैठक आयोजित की गई। समिति ने प्रारंभिक स्तर पर दवा उपलब्ध कराने के आरोपित छात्र के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उसे विद्यालय से स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) देने का निर्णय लिया है।समिति अध्यक्ष भूपेंद्र यादव ने बताया कि विद्यार्थियों से लगातार पूछताछ की जा रही है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्होंने दवा का सेवन किस उद्देश्य से किया। छात्र अलग-अलग कारण बता रहे हैं, जिससे जांच और जटिल हो गई है।

स्कूल पहुंची एनएसयूआई की टीम

मामले की जानकारी मिलने के बाद एनएसयूआई के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी विद्यालय पहुंचे। उन्होंने छात्रों की स्थिति और घटना की परिस्थितियों की जानकारी ली तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

विशेषज्ञों की चेतावनी

सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज के अनुसार, “जिल्फोडीन” दवा का उपयोग नींद लाने के लिए किया जाता है। इसकी अधिक मात्रा का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे मामलों में तत्काल चिकित्सकीय सहायता आवश्यक होती है।

अभिभावकों और स्कूलों के लिए चेतावनी

यह घटना स्कूलों में विद्यार्थियों के बीच दवाओं की पहुंच और उनके दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों की गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखने के साथ-साथ उन्हें दवाओं के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना भी आवश्यक है।