अस्पताल में रिश्तेदार को फोन करने के बहाने मोबाइल ले उड़ा आरोपी, खाते से उड़ाए 1.48 लाख रुपये; 55,700 की सामग्री बरामद

दुर्ग। शासकीय जिला अस्पताल दुर्ग में मरीज के परिजन से रिश्तेदार को फोन करने के बहाने मोबाइल लेना एक व्यक्ति को महंगा पड़ गया। मोबाइल हाथ लगते ही आरोपी ने उसका दुरुपयोग कर बैंक खाते से 1 लाख 48 हजार 301 रुपये की धोखाधड़ी कर दी। शिकायत के बाद सिटी कोतवाली दुर्ग पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से ठगी की रकम से खरीदी गई सामग्री और नकदी समेत कुल 55,700 रुपये का सामान बरामद किया है।

रिश्तेदार को फोन करने के बहाने मांगा मोबाइल

मिली जानकारी के अनुसार, 05 सितंबर 2026 को ग्राम महमरा निवासी 35 वर्षीय कुलेश्वर निषाद अपने पिता के उपचार के सिलसिले में शासकीय जिला अस्पताल दुर्ग में मौजूद थे। इसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने उनसे रिश्तेदार को फोन करने की बात कहकर मोबाइल मांगा।

आरोपी की बात पर भरोसा करते हुए प्रार्थी ने उसे अपना मोबाइल दे दिया। मोबाइल मिलने के बाद आरोपी वहां से चला गया। बाद में प्रार्थी को पता चला कि उसके मोबाइल का इस्तेमाल कर उसके बैंक खाते से 1,48,301 रुपये की राशि निकाल ली गई है।

तकनीकी साक्ष्यों से आरोपी तक पहुंची पुलिस

घटना की शिकायत मिलने पर थाना सिटी कोतवाली दुर्ग में अपराध क्रमांक 482/2026, धारा 318(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपी की पतासाजी शुरू की। जांच के दौरान पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की।

पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम कमलजीत बांदे उर्फ कमल (29 वर्ष), निवासी ग्राम तमोरा, थाना रानचिरई, जिला बालोद बताया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने मोबाइल के माध्यम से बैंक खाते से रकम की धोखाधड़ी करना स्वीकार किया।

ठगी की रकम से खरीदा सामान, नकदी भी बरामद

आरोपी की निशानदेही और कब्जे से पुलिस ने ठगी की रकम से खरीदी गई विभिन्न सामग्री तथा नगद रकम बरामद की। पुलिस द्वारा बरामद सामान में—

  • सोने का मंगलसूत्र — करीब 17,000 रुपये
  • घड़ी — करीब 1,000 रुपये
  • पावर बैंक — करीब 1,000 रुपये
  • मोबाइल फोन — करीब 16,500 रुपये
  • नगद — 20,200 रुपये

शामिल हैं। बरामद सामग्री की कुल अनुमानित कीमत 55,700 रुपये बताई गई है।

अस्पताल में विश्वास जीतकर करता था वारदात

पुलिस के मुताबिक आरोपी का तरीका यह था कि वह अस्पताल में मरीजों के परिजनों को निशाना बनाता था। वह रिश्तेदार या परिचित को फोन करने की बात कहकर मोबाइल मांगता था। मोबाइल अपने कब्जे में लेने के बाद उसका दुरुपयोग कर बैंकिंग लेन-देन के जरिए रकम की धोखाधड़ी करता और इसके बाद उस रकम से सामान खरीद लेता था।

आरोपी के खिलाफ पहले भी दर्ज हैं मामले

आईसीजेएस अभिलेख के अनुसार आरोपी कमलजीत बांदे के नाम से पूर्व में भी मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें—

  1. अपराध क्रमांक 218/2020, थाना उतई, धारा 13 जुआ अधिनियम।
  2. अपराध क्रमांक 549/2024, थाना सिटी कोतवाली दुर्ग, धारा 305(बी) बीएनएस।

शामिल हैं।

न्यायिक रिमांड पर भेजा गया आरोपी

पुलिस ने आरोपी को विधिवत गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक रिमांड के लिए माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।

इस कार्रवाई में थाना सिटी कोतवाली दुर्ग पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण, आरोपी की पतासाजी, गिरफ्तारी और ठगी की रकम से खरीदी गई सामग्री की बरामदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से की अपील

दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अपरिचित व्यक्ति को किसी भी बहाने से अपना मोबाइल फोन न दें। मोबाइल फोन में बैंकिंग और वित्तीय जानकारी उपलब्ध होने के कारण उसके दुरुपयोग से बड़ी आर्थिक क्षति हो सकती है।

पुलिस ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन या डिजिटल माध्यम से ठगी होती है तो वह तत्काल अपने बैंक और पुलिस को सूचना दे, ताकि समय रहते रकम को सुरक्षित करने और आरोपी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने का प्रयास किया जा सके।