6 साल की बालिका से दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी सोमेश यादव को मृत्युदंड, दुर्ग की विशेष POCSO कोर्ट का बड़ा फैसला
दुर्ग। थाना मोहन नगर क्षेत्र में 6 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म और हत्या के गंभीर मामले में विशेष POCSO न्यायालय, दुर्ग ने आरोपी सोमेश यादव (24 वर्ष) को मृत्युदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने मामले को “विरलतम से विरलतम” श्रेणी का अपराध मानते हुए पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड सुनाया। साथ ही अन्य धाराओं में भी सजा और अर्थदंड लगाया गया है।
यह फैसला 10 सितंबर 2026 को अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफ.टी.एस.सी., विशेष न्यायालय (POCSO), दुर्ग द्वारा विशेष दाण्डिक प्रकरण क्रमांक 44/2025 में सुनाया गया।
लापता होने की सूचना मिलते ही शुरू हुई तलाश
मामला थाना मोहन नगर के अपराध क्रमांक 133/2025 से संबंधित है। पुलिस के अनुसार, 6 अप्रैल 2025 को थाना क्षेत्र से 6 वर्ष 3 माह की बालिका के लापता होने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही मोहन नगर पुलिस ने बिना समय गंवाए बालिका की तलाश शुरू की।
पुलिस टीमों ने संभावित स्थानों पर पतासाजी के साथ उपलब्ध तकनीकी एवं मैदानी सूचनाओं के आधार पर खोज अभियान चलाया। इसी दौरान बालिका को एक वाहन से बरामद किया गया। पुलिस ने तत्काल उसे चिकित्सकीय सहायता के लिए अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर शव पंचनामा, पोस्टमार्टम सहित आवश्यक वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ की।
वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर हुई विवेचना
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर वहां उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से संकलन किया। विवेचना को केवल मौखिक या परिस्थितिजन्य साक्ष्यों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि जैविक, चिकित्सकीय, DNA, भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जांच का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया।
पुलिस द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण कर नजरी नक्शा तैयार किया गया तथा आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए। आरोपी की पहचान कर उसे विधिवत गिरफ्तार किया गया। आरोपी के मेमोरेण्डम कथन के आधार पर संबंधित वस्तुओं की बरामदगी एवं जप्ती की गई।
मृतिका के आवश्यक जैविक नमूने, कपड़े, स्वाब, बाल, नाखून तथा अन्य संबंधित सामग्री सुरक्षित कर वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजी गई। आरोपी एवं संबंधित व्यक्तियों के DNA परीक्षण के लिए भी नमूने लिए गए।
इसके अलावा घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध CCTV फुटेज एवं DVR को सुरक्षित कर जप्त किया गया। जप्त सामग्री को FSL और DNA परीक्षण के लिए भेजा गया तथा प्राप्त वैज्ञानिक रिपोर्टों को चिकित्सकीय एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ विवेचना में शामिल किया गया।
वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों ने मजबूत किया अभियोजन का पक्ष
दुर्ग पुलिस की विवेचना में विभिन्न प्रकार के साक्ष्यों को आपस में जोड़कर प्रकरण को साक्ष्य आधारित बनाया गया। पुलिस ने घटनास्थल से प्राप्त सामग्री, चिकित्सकीय साक्ष्य, DNA रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया।
इन साक्ष्यों को विधिवत दस्तावेजीकृत कर अभियोजन के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसी साक्ष्य आधारित विवेचना के परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध माना।
आरोपी को दो धाराओं में मृत्युदंड
न्यायालय ने आरोपी सोमेश यादव, उम्र 24 वर्ष, निवासी ओम नगर, उरला, वार्ड क्रमांक 58, थाना मोहन नगर, जिला दुर्ग को पॉक्सो अधिनियम, 2012 की धारा 5(ड) एवं 5(ढ) सहपठित धारा 6(1) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 65(2) एवं 238(क) के तहत दोषसिद्ध किया।
न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत आरोपी को मृत्युदंड सुनाया। दोनों धाराओं में ₹5,000-₹5,000 अर्थदंड भी लगाया गया।
इसके अतिरिक्त भारतीय न्याय संहिता की धारा 238(क) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹1,000 अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
न्यायालय के आदेश के अनुसार उक्त सजाएं एक साथ भुगताई जानी हैं। मृत्युदंड की पुष्टि की प्रक्रिया कानून के अनुसार छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के समक्ष होगी।
पीड़ित परिवार को 7 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति
न्यायालय ने मृतिका के परिजनों को राज्य सरकार की आहत प्रतिकर योजना के तहत ₹7 लाख की क्षतिपूर्ति प्रदान किए जाने का निर्देश भी दिया है।
विशेष टीम ने संभाली थी जांच की कमान
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष टीम गठित की गई थी। टीम का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर द्वारा किया गया। वहीं थाना प्रभारी एवं निरीक्षक शिव चंद्रा सहित थाना मोहन नगर के विवेचक और अन्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पतासाजी, घटनास्थल से साक्ष्य संरक्षण, वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य संकलन, आरोपी की गिरफ्तारी, FSL एवं DNA परीक्षण तथा न्यायालयीन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती रूपवर्षा दिल्लीवार ने मामले की पैरवी की। पुलिस के अनुसार प्रकरण को न्यायालय तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में अभियोजन पक्ष की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बाल अपराधों में त्वरित कार्रवाई पर जोर
दुर्ग पुलिस ने कहा कि इस प्रकरण में सूचना प्राप्त होने से लेकर बालिका की तलाश, चिकित्सकीय सहायता, साक्ष्य संरक्षण, आरोपी की गिरफ्तारी, वैज्ञानिक परीक्षण और न्यायालयीन प्रक्रिया तक प्रत्येक स्तर पर विधिसम्मत एवं साक्ष्य आधारित कार्रवाई सुनिश्चित की गई।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि बच्चों से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि, गुमशुदगी या अपराध की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। समय पर सूचना मिलने से पुलिस को त्वरित कार्रवाई करने और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
दुर्ग पुलिस ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के मामलों में त्वरित, निष्पक्ष, संवेदनशील और वैज्ञानिक विवेचना सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।
गोपनीयता का ध्यान: बालिका की पहचान की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उसके नाम, फोटो, पता अथवा पहचान उजागर करने वाली किसी भी जानकारी को प्रकाशित नहीं किया गया है।



