चरोदा में चोरों का आतंक! दो सूने मकानों के ताले टूटे, लाखों के जेवर पार
परिवार दशगात्र और रिश्तेदार से मिलने गया था बाहर, पीछे से चोरों ने खंगाल दिए घर; पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
भिलाई-चरोदा। पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में चोरों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका अंदाजा एक ही इलाके में सामने आई चोरी की दो वारदातों से लगाया जा सकता है। दादर रोड चरोदा क्षेत्र में चोरों ने दो ऐसे मकानों को निशाना बनाया, जिनके परिवार कुछ दिनों के लिए बाहर गए हुए थे। दोनों मकानों के ताले और कुंडियां तोड़कर अज्ञात चोर घर के भीतर दाखिल हुए और सोने-चांदी के जेवरात समेत करीब 1.85 लाख रुपये का माल साफ कर फरार हो गए।
लगातार सामने आई इन घटनाओं ने पुरानी भिलाई पुलिस की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब रहवासी अपने घरों में ताला लगाकर बाहर जाते हैं तो क्या पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह जाती है?
पहली वारदात : चार दिन सूना रहा मकान, टूटे मिले ताले
राजस्थान में एक कंपनी में मैकेनिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत अलुरी भार्गव का मकान खसरा नंबर 678/7, शंकर नगर, दादर रोड चरोदा में है। उनके माता-पिता भी इसी मकान में रहते हैं। शिकायत के अनुसार 4 सितंबर की सुबह करीब 6 बजे माता-पिता घर में ताला लगाकर अपने छोटे बेटे नवीन से मिलने पुणे चले गए थे। भार्गव भी राजस्थान से पुणे गए थे।
7 सितंबर की रात करीब 8 बजे जब परिवार वापस घर पहुंचा तो मुख्य गेट का ताला लगा हुआ था। लेकिन अंदर जाने पर चैनल गेट और दरवाजे के ताले टूटे मिले। कमरों में रखे सामान को अस्त-व्यस्त कर दिया गया था और आलमारी का लॉक भी टूटा हुआ था।
सामान की जांच करने पर दो सोने की चूड़ियां, सोने का नेकलेस, काले मोती वाला रानी हार, तीन सोने की चेन, सोने की बाली, सफेद मोती वाला सोने का हार, चांदी के ग्लास, लोटा, दीपक, कटोरियां, पायल और टाइटन कंपनी की हाथ घड़ी सहित अन्य सामान गायब मिला। शिकायतकर्ता ने चोरी गए सामान की कुल कीमत करीब 90 हजार रुपये बताई है।
दूसरी वारदात : दशगात्र में गया परिवार, पीछे से घर साफ
दूसरी घटना खसरा नंबर 678/28, इको सिटी के पीछे दादर रोड चरोदा निवासी कुनाल इंगले के मकान में हुई। जिंदल कंपनी ओडिशा में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर कार्यरत कुनाल 3 सितंबर को छुट्टी में अपने घर आए थे। नाना जी के निधन के बाद दशगात्र कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 5 सितंबर की दोपहर करीब 2:30 बजे वे परिवार के साथ घर में ताला लगाकर वर्धा, महाराष्ट्र चले गए।
7 सितंबर शाम करीब 4 बजे परिवार वापस लौटा तो मकान के मुख्य गेट की कुंडी टूटी मिली। सामने के दरवाजे की कुंडी भी तोड़ दी गई थी। अंदर कमरों में सामान बिखरा पड़ा था और आलमारियों के लॉक टूटे हुए थे।
जांच करने पर दो सोने के मंगलसूत्र, सोने का नेकलेस, चार सोने की चूड़ियां, सोने की चेन, सोने का कड़ा, दो सोने की अंगूठियां, चांदी की पायल, बिछिया, बच्चों के कंगन और चांदी की चेन समेत अन्य सामान गायब मिला। शिकायतकर्ता के अनुसार चोरी गए सामान की कीमत करीब 95 हजार रुपये है।
एक ही इलाके में दो चोरी, फिर भी सवाल वही—कहां थी पुलिस की गश्त?
दोनों वारदातों में एक समान बात सामने आई है—परिवार घर में ताला लगाकर बाहर गया और पीछे से चोरों ने ताले तोड़कर घर खंगाल दिया। इससे दादर रोड और आसपास के रहवासियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रहवासियों का सवाल है कि यदि पुलिस की नियमित गश्त प्रभावी है तो चोरों को घरों के ताले तोड़ने और अंदर सामान खंगालने का इतना समय कैसे मिला? क्या पुलिस की रात्रिकालीन पेट्रोलिंग केवल औपचारिकता बनकर रह गई है? क्या सूने मकानों की निगरानी के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है?
चोरी की घटनाएं होने के बाद मामला दर्ज करना पुलिस की कानूनी जिम्मेदारी है, लेकिन अपराध रोकना उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है। लगातार बढ़ती चोरी की घटनाएं यदि पुलिस की सक्रियता पर सवाल खड़े कर रही हैं तो इन सवालों का जवाब भी पुलिस प्रशासन को ही देना होगा।
पुरानी भिलाई पुलिस ने दोनों मामलों में धारा 305(ए) और 331(4) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि पुलिस इन वारदातों का जल्द खुलासा कर चोरों तक पहुंचती है या फिर ये मामले भी लंबी जांच और अज्ञात आरोपियों की फाइलों में दबकर रह जाते हैं।



