बदहाल ओपन जिम पर कुम्हारी में सियासी घमासान, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
अखबार में खबर छपते ही गरमाई सियासत, विकास कार्यों को लेकर दोनों दलों में आरोप-प्रत्यारोप; पालिका प्रशासन अब सुधार में जुटा
राकेश कुमार की रिपोर्ट
कुम्हारी। नगर पालिका परिषद कुम्हारी के वार्ड क्रमांक 16, राजीव भवन परसदा स्थित बदहाल ओपन जिम अब महज सुविधाओं की बदहाली का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय राजनीति का नया अखाड़ा बन गया है। ओपन जिम की जर्जर और अव्यवस्थित स्थिति को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद भाजपा और कांग्रेस के पार्षद आमने-सामने आ गए हैं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर विकास कार्यों में लापरवाही और जनता के पैसों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मामला सामने आने के बाद नगर पालिका प्रशासन भी सक्रिय हुआ है। संबंधित स्थल पर व्यवस्थाओं को सुधारने और ओपन जिम को दुरुस्त करने की कवायद शुरू कर दी गई है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम लोगों को वास्तविक सुविधा कब मिलेगी।
कांग्रेस पार्षद का हमला—विकास कार्यों पर लगा ब्रेक
कांग्रेस पार्षद डिकेन्द्र साहू, वार्ड क्रमांक 13 परसदा ने भाजपा के नेतृत्व वाली नगर पालिका व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर में विकास कार्यों की रफ्तार थम गई है और पूर्व में कराए गए कार्यों के संरक्षण तक की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
उन्होंने कहा कि शहर के कई हिस्सों में लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं। ऐसे में विकास की प्राथमिकताएं तय करने में गंभीर चूक दिखाई दे रही है। उनका आरोप है कि जहां सड़क की वास्तविक आवश्यकता नहीं है, वहां भी कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने की नीयत से सड़क निर्माण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
डिकेन्द्र साहू ने कहा कि नगर की जरूरतों के मुताबिक विकास कार्य होने चाहिए, न कि व्यक्तिगत हितों और राजनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर।
भाजपा पार्षद ने कांग्रेस को घेरा
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा पार्षद उमाकांत साहू ने भी पलटवार करते हुए कांग्रेस के पुराने कार्यकाल को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व कांग्रेस शासन में जनता के पैसों का उपयोग ऐसे कार्यों में किया गया, जिनकी प्राथमिकता और उपयोगिता पर सवाल खड़े होते हैं।
उमाकांत साहू ने आरोप लगाया कि नगर के सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों रुपये के पेवर ब्लॉक मंगाए गए, लेकिन उनका इस्तेमाल भी कथित तौर पर चुनिंदा लोगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लाभ पहुंचाने में किया गया। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे का हिसाब जनता को मिलना चाहिए और विकास कार्यों में पारदर्शिता जरूरी है।
ओपन जिम पर भी उठे सवाल
भाजपा पार्षद ने बदहाल ओपन जिम को लेकर भी पूर्व व्यवस्था पर निशाना साधा। उनका कहना है कि कुछ स्थानों पर ओपन जिम तो स्थापित कर दिए गए, लेकिन उनकी उपयोगिता, स्थान चयन, सुरक्षा और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
यही वजह है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि जनता को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सरकारी योजनाएं केवल उपकरण लगाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका नियमित रखरखाव भी उतना ही जरूरी है।
अखबार में खबर के बाद हरकत में आया प्रशासन
ओपन जिम की बदहाली का मुद्दा सार्वजनिक होने के बाद नगर पालिका प्रशासन सक्रिय नजर आ रहा है। संबंधित स्थल की स्थिति सुधारने और ओपन जिम को व्यवस्थित करने की दिशा में कार्रवाई शुरू की गई है। अब प्रशासन के सामने चुनौती केवल उपकरणों की मरम्मत की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि भविष्य में सार्वजनिक संसाधनों की ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
सवाल सिर्फ ओपन जिम का नहीं, जनता के पैसों का है
कुम्हारी में छिड़ी यह सियासी जंग अब आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने आरोपों के साथ जनता के बीच खड़े हैं। लेकिन इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल राजनीतिक बयानबाजी से अलग है—जनता के पैसों से तैयार की गई सार्वजनिक सुविधाओं का रखरखाव आखिर किसकी जिम्मेदारी है?
वार्डवासियों को अब आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि दुरुस्त ओपन जिम और बेहतर नागरिक सुविधाएं चाहिए। प्रशासन की कार्रवाई के बाद यह देखना अहम होगा कि बदहाल ओपन जिम वास्तव में फिर से उपयोगी बनता है या मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाता है।



