महीनों से डॉक्टर नदारद, शहरी स्वास्थ्य केंद्र चरोदा बेहाल! गर्भवती महिलाओं की बढ़ी परेशानी, स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
चरोदा/भिलाई-चरोदा। भिलाई-चरोदा नगर निगम क्षेत्र के चरोदा स्थित शहरी स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र की मुख्य चिकित्सक पिछले कई महीनों से अवकाश पर हैं, जिसके चलते यहां आने वाले मरीजों को इलाज और चिकित्सकीय परामर्श के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं और बुजुर्ग मरीजों को होने की बात सामने आ रही है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जब स्वास्थ्य केंद्र में नियमित रूप से मुख्य चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं तो आखिर स्वास्थ्य विभाग द्वारा वैकल्पिक चिकित्सकीय व्यवस्था क्यों नहीं की गई? लोगों का कहना है कि शहरी स्वास्थ्य केंद्र जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा को लंबे समय तक चिकित्सक की कमी के बीच संचालित करना आम जनता के स्वास्थ्य के साथ गंभीर लापरवाही का मामला है।
गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी
स्वास्थ्य केंद्र में गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। गर्भावस्था के दौरान समय पर चिकित्सकीय परामर्श बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यदि महिलाओं को डॉक्टर से मिलने के लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल का रुख करना पड़े तो यह उनके लिए अतिरिक्त परेशानी और खर्च का कारण बनता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का उद्देश्य ही यह है कि सामान्य एवं जरूरतमंद परिवारों को उनके आसपास स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो। लेकिन यदि डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं होंगे तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का लाभ आम जनता तक कैसे पहुंचेगा?
सीएमएचओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल
मामले में दुर्ग जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि महीनों से चिकित्सक की अनुपस्थिति के बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
लोगों का सवाल है कि क्या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शहरी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक की उपलब्धता की नियमित जानकारी नहीं मिलती? यदि जानकारी है, तो अब तक वैकल्पिक डॉक्टर की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? और यदि जानकारी नहीं है, तो यह विभागीय निगरानी व्यवस्था पर ही बड़ा सवाल है।
‘अस्पताल चल रहा है या सिर्फ व्यवस्था का दिखावा?’
नागरिकों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र भवन, संसाधन और कर्मचारियों के बावजूद यदि मरीजों को आवश्यक चिकित्सकीय सेवा के लिए भटकना पड़े तो ऐसी व्यवस्था का आम जनता को क्या लाभ?
लोगों का कहना है कि अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल कागजों में स्वास्थ्य केंद्र संचालित दिखाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि मरीजों को मौके पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा मिले। खासकर गर्भवती महिलाओं के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही को सामान्य प्रशासनिक समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जनता ने की तत्काल वैकल्पिक डॉक्टर की मांग
स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि चरोदा शहरी स्वास्थ्य केंद्र में तत्काल नियमित चिकित्सक की व्यवस्था की जाए। जब तक मुख्य चिकित्सक ड्यूटी पर वापस नहीं आतीं, तब तक वैकल्पिक चिकित्सक की नियुक्ति की जाए, ताकि मरीजों और गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि महीनों से डॉक्टर की अनुपस्थिति के बावजूद स्वास्थ्य विभाग कब जागेगा? क्या अधिकारियों की नजर इस समस्या पर पड़ेगी या फिर आम जनता को इसी तरह स्वास्थ्य सुविधा के लिए परेशान होना पड़ेगा?
नोट: मुख्य चिकित्सक के अवकाश पर होने और वैकल्पिक व्यवस्था की स्थिति से संबंधित आधिकारिक विभागीय पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।



