स्वतंत्रता दिवस पर 9 सजायाफ्ता कैदियों को मिली नई जिंदगी, अच्छे आचरण पर समय से पहले रिहाई
हाथों में श्रीमद्भागवत गीता लेकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का लिया संकल्प, परिजनों की आंखों में छलके खुशी के आंसू
राकेश सोनकर की रिपोर्ट
रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रायपुर सेंट्रल जेल में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब अच्छे आचरण, अनुशासन और जेल अवधि के दौरान सकारात्मक व्यवहार के आधार पर 9 सजायाफ्ता कैदियों को शासन की विशेष छूट नीति के तहत समय से पूर्व रिहा किया गया। आजादी के पर्व पर इन कैदियों के लिए यह रिहाई उनके जीवन में एक नई शुरुआत का संदेश लेकर आई।
जेल परिसर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण के बाद वरिष्ठ जेल अधिकारियों की मौजूदगी में रिहा किए गए कैदियों को रिहाई प्रमाण पत्र सौंपे गए। इस दौरान जेल प्रशासन ने उन्हें भविष्य में अपराध से दूर रहकर समाज की मुख्यधारा में जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन बिताने के लिए प्रेरित किया।
सजा के साथ सुधार भी जेल का उद्देश्य
रिहाई के अवसर पर जेल अधीक्षक ने कहा कि जेल का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि बंदियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाकर उन्हें समाज में पुनर्वास के लिए तैयार करना भी है। रिहा किए गए कैदियों ने जेल में रहते हुए अनुशासन और अच्छे आचरण का परिचय दिया है। उम्मीद है कि वे अब अपने जीवन की नई शुरुआत करते हुए जिम्मेदार और सम्मानित नागरिक की भूमिका निभाएंगे।
हाथों में गीता, मन में नई जिंदगी का संकल्प
रिहाई के दौरान कैदियों के हाथों में श्रीमद्भागवत गीता नजर आई। उन्होंने समाज की मुख्यधारा में लौटकर ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ जीवन जीने का संकल्प व्यक्त किया। जेल प्रशासन की ओर से उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने और दोबारा अपराध की राह पर नहीं जाने के लिए प्रेरित किया गया।
अपनों से मिलकर छलकी खुशी
जैसे ही रिहा हुए कैदी जेल के मुख्य द्वार से बाहर निकले, वहां अपने परिजनों का इंतजार करते देख भावुक हो गए। लंबे समय बाद अपनों से मुलाकात का यह पल परिवारों के लिए बेहद भावुक रहा। कई परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े और उन्होंने अपने प्रियजनों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
हुनर के सहारे आत्मनिर्भर बनने की सीख
जेल प्रशासन ने रिहा हुए कैदियों को अपराध से दूर रहकर अपने हुनर के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी। जेल प्रवास के दौरान कई कैदियों ने हस्तशिल्प, बढ़ईगिरी और सिलाई जैसी व्यावसायिक गतिविधियों का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रशासन का मानना है कि यह प्रशिक्षण उन्हें जेल से बाहर निकलने के बाद रोजगार और सम्मानजनक जीवन जीने में मददगार साबित होगा।
स्वतंत्रता दिवस पर मिली यह रिहाई इन 9 कैदियों के लिए केवल जेल की चारदीवारी से बाहर आने का अवसर नहीं, बल्कि गलतियों से सीख लेकर बेहतर और जिम्मेदार जीवन की ओर लौटने की नई शुरुआत भी बनी।

