मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर म्यूल अकाउंट का खेल, 2 आरोपी गिरफ्तार; च्वाईस सेंटर संचालकों से नगद लेकर कर रहे थे साइबर ठगी

 मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर म्यूल अकाउंट का खेल, 2 आरोपी गिरफ्तार; च्वाईस सेंटर संचालकों से नगद लेकर कर रहे थे साइबर ठगी

जामुल पुलिस ने खोला बैंक खातों के दुरुपयोग का मामला, रकम आने के बाद साइबर शिकायत से खाताधारकों के खाते होते थे होल्ड

जामुल/दुर्ग। मेडिकल इमरजेंसी का झांसा देकर च्वाईस सेंटर संचालकों के बैंक खातों में रकम मंगवाने और उसके बदले नगद राशि हासिल करने वाले गिरोह का जामुल पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों लोकेश कुमार मालवीय (43) और दिनेश मालवीय (56) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी बैंक खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में कर साइबर ठगी की रकम को नगद में बदलने का काम कर रहे थे। दोनों आरोपियों को 14 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

मेडिकल इमरजेंसी बताकर मांगी गई थी नगद रकम

पुलिस के मुताबिक शिवपुरी, जामुल निवासी चंदन साहू च्वाईस सेंटर का संचालन करता है। 10 मार्च 2026 को एक युवती ने मेडिकल इमरजेंसी की आवश्यकता बताते हुए कहा कि उसके परिचित द्वारा चंदन साहू के बैंक खाते में रकम भेजी जाएगी और उसके बदले उसे नगद राशि चाहिए।

विश्वास में आकर च्वाईस सेंटर संचालक ने खाते में आई रकम के बदले नगद राशि दे दी। हालांकि घटना के दो दिन बाद साइबर ठगी संबंधी शिकायत के चलते बैंक ने चंदन साहू का खाता होल्ड कर दिया। इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई।

जांच में सामने आया म्यूल अकाउंट का नेटवर्क

विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला कि केवल एक च्वाईस सेंटर संचालक ही नहीं, बल्कि अन्य च्वाईस सेंटर संचालकों से भी अलग-अलग रकम नगद प्राप्त की गई थी। पुलिस ने बैंक लेन-देन, उपलब्ध साक्ष्यों, तकनीकी जानकारी और मुखबिर सूचना के आधार पर संदिग्धों की पतासाजी शुरू की।

पूछताछ एवं विवेचना में सामने आया कि आरोपी योजनाबद्ध तरीके से बैंक खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में करते थे। दूसरे स्रोतों से खातों में रकम मंगवाई जाती और इसके बदले च्वाईस सेंटर संचालकों से नगद राशि प्राप्त की जाती थी। बाद में जब संबंधित रकम को लेकर साइबर शिकायत होती, तो खाताधारक का बैंक खाता होल्ड हो जाता था।

इस तरह देते थे वारदात को अंजाम

पुलिस जांच के अनुसार आरोपियों का तरीका बेहद सुनियोजित था। पहले मेडिकल इमरजेंसी जैसी जरूरत बताकर च्वाईस सेंटर संचालक को विश्वास में लिया जाता था। इसके बाद किसी अन्य व्यक्ति या स्रोत से संबंधित बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करवाई जाती थी। रकम खाते में आने के बाद च्वाईस सेंटर संचालक से उसके बदले नगद राशि प्राप्त कर ली जाती थी।

इस प्रक्रिया में बैंक खाते का इस्तेमाल म्यूल अकाउंट के तौर पर किया जाता था। बाद में जब ट्रांसफर की गई रकम साइबर अपराध से जुड़ी होने की शिकायत सामने आती, तो खाताधारक का बैंक खाता होल्ड हो जाता था।

दो आरोपी गिरफ्तार

साक्ष्यों और मुखबिर सूचना के आधार पर जामुल पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार पूछताछ में बैंक खातों के माध्यम से अलग-अलग व्यक्तियों से नगद राशि प्राप्त करने की जानकारी सामने आई।

गिरफ्तार आरोपी—

  1. लोकेश कुमार मालवीय, उम्र 43 वर्ष, निवासी बसंत बिहार कॉलोनी, महावीर नगर, थाना राजेन्द्र नगर, जिला रायपुर।
  2. दिनेश मालवीय, उम्र 56 वर्ष, निवासी न्यू सब्जी मंडी, अहिवारा, थाना नंदिनी, जिला दुर्ग।

बैंक लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी

पुलिस ने बताया कि प्रकरण से जुड़े बैंक खातों, लेन-देन और अन्य दस्तावेजी एवं डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच में सामने आए अन्य संभावित खातों और लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।

अपराध क्रमांक: 563/2026
धारा: 318(4), 3(5) बीएनएस

च्वाईस सेंटर संचालकों और आम लोगों से पुलिस की अपील

दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों और च्वाईस सेंटर संचालकों से सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते में रकम प्राप्त कर उसके बदले नगद राशि न दें। बैंक खाते का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति के लेन-देन के लिए करने से पहले रकम के स्रोत और लेन-देन की वैधता की पूरी जानकारी सुनिश्चित करें।

संदिग्ध लेन-देन की जानकारी तत्काल संबंधित बैंक और पुलिस को दें। साइबर अपराध में बैंक खाते के इस्तेमाल होने पर खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है।

पुलिस टीम की भूमिका

पूरी कार्रवाई में थाना जामुल पुलिस टीम ने विवेचना, साक्ष्य संकलन, तकनीकी जानकारी के विश्लेषण और आरोपियों की पतासाजी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।