“नगर निगम जाने वाली सड़क ही गड्ढों में दबी! फिर भी अफसरों के भाषणों में ‘विकास’ फुल स्पीड में”

 “नगर निगम जाने वाली सड़क ही गड्ढों में दबी! फिर भी अफसरों के भाषणों में ‘विकास’ फुल स्पीड में”

भिलाई-3 — कहते हैं किसी भी शहर की असली तस्वीर उसके मुख्य मार्ग से दिखाई देती है। लेकिन भिलाई-चरोदा नगर निगम जाने वाले मुख्य मार्ग की हालत देखकर ऐसा लगता है मानो विकास सड़क पर नहीं, सीधे गड्ढों में उतर गया हो। सड़क पर गड्ढे हैं या गड्ढों के बीच सड़क बची है, यह समझना आम जनता के लिए भी अब पहेली बन चुका है।नगर निगम कार्यालय तक पहुंचने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं। लेकिन हर सफर अब जोखिम भरा बन चुका है। दोपहिया वाहन चालक डरते-डरते निकलते हैं, जबकि बारिश के दिनों में ये गड्ढे हादसों का खुला निमंत्रण बन जाते हैं। लोगों का कहना है कि यहां सड़क कम और “टेस्ट ड्राइव ट्रैक” ज्यादा नजर आता है।

“जिस सड़क से अधिकारी रोज गुजरते हैं, उसकी हालत ऐसी है तो बाकी वार्डों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।”

हैरानी की बात यह है कि दूसरी ओर निगम के जिम्मेदार अधिकारी हर मंच पर विकास और गुणवत्ता पूर्ण कार्यों की तारीफ करते नहीं थकते। भाषणों में शहर चमकता नजर आता है, लेकिन जमीन पर जनता की गाड़ियां गड्ढों में हिचकोले खाती दिखाई देती हैं। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों का सच उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही सामने आ जाता है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर में बनने वाली सड़कों और अन्य कार्यों की गुणवत्ता इतनी कमजोर है कि कुछ महीनों में ही उनकी परतें उखड़ जाती हैं। अब आम जनता भी खुलकर सवाल पूछने लगी है कि आखिर इतना “सेटिंग और सेक्शन मनी” के खेल में गुणवत्ता कैसे बच सकती है?

“नगर निगम अगर एक भी ऐसा काम बता दे जो लंबे समय तक गुणवत्ता के साथ टिक पाया हो, तो शायद जनता भी तालियां बजा दे।”

लोगों का यह भी कहना है कि हर बार किसी नई योजना, नए उद्घाटन या नए भाषण के जरिए असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती है। लेकिन अब जनता भी समझने लगी है कि पोस्टर और प्रेस नोट से सड़कें नहीं बनतीं। विकास के दावों की असली परीक्षा जनता के पैरों और वाहनों के नीचे होती है।अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर नगर निगम मुख्य मार्ग की इस बदहाल तस्वीर पर जिम्मेदारों की नजर कब पड़ेगी? या फिर जनता यूं ही गड्ढों में विकास तलाशती रहेगी और अधिकारी फाइलों में “स्मार्ट सिटी” का सपना दिखाते रहेंगे?