दुर्ग में रिश्वतखोरी पर बड़ी कार्रवाई: जमीन बंटवारे के नाम पर 45 हजार लेने वाला पटवारी निलंबित
वायरल वीडियो की जांच के बाद प्रशासन सख्त, SDM ने जारी किया निलंबन आदेश
दुर्ग जिले में जमीन बंटवारे के मामले में रिश्वत लेने के आरोपों के बाद प्रशासन ने एक पटवारी पर बड़ी कार्रवाई की है।
भिलाई-3 अनुविभाग क्षेत्र में पदस्थ पटवारी लेकेश्वर सिंह ठाकुर को 45 हजार रुपये लेने के मामले में निलंबित कर दिया गया है।
यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और उसके बाद हुई राजस्व विभाग की जांच के आधार पर की गई।
सोशल मीडिया वीडियो से खुला मामला
मामले की शुरुआत उस वक्त हुई जब इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में कथित तौर पर पटवारी को जमीन बंटवारे के एवज में रुपये लेते और राशि लौटाने की बात करते देखा-सुना गया।
वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए।
कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर तहसीलदार अहिवारा द्वारा पूरे प्रकरण की जांच की गई। जांच के दौरान संबंधित पक्षकारों और पटवारी के बयान दर्ज किए गए।
जांच में क्या सामने आया
जांच के दौरान भूमिस्वामी उत्तम टंडन, अमन कुमार टंडन और पटवारी लेकेश्वर सिंह ठाकुर के बयान लिए गए।
जांच प्रतिवेदन में यह तथ्य सामने आया कि जमीन बंटवारे की प्रक्रिया के लिए 45 हजार रुपये की राशि पटवारी को दी गई थी।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में पटवारी ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने पक्षकार की माता से रकम ली थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वायरल वीडियो में वे वेतन मिलने के बाद पैसे वापस करने की बात कर रहे थे।
SDM ने जारी किया निलंबन आदेश
जांच रिपोर्ट के आधार पर भिलाई-3 के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व महेश सिंह राजपूत ने तत्काल प्रभाव से पटवारी लेकेश्वर सिंह ठाकुर को निलंबित कर दिया।
जारी आदेश में कहा गया है कि सरकारी कार्य के बदले राशि लेना और कर्तव्य निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरतना
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-03 एवं नियम-14 का उल्लंघन है।
इसे कदाचार की श्रेणी में माना गया है।
निलंबन अवधि में यहां रहेगा मुख्यालय
प्रशासनिक आदेश के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान पटवारी ठाकुर का मुख्यालय तहसील कार्यालय अहिवारा निर्धारित किया गया है।
साथ ही उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने की पात्रता भी रहेगी।
प्रशासनिक सख्ती का संकेत
राजस्व विभाग की इस कार्रवाई को प्रशासन की भ्रष्टाचार के प्रति सख्त नीति के तौर पर देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल मामलों में अब त्वरित जांच और कार्रवाई का सिलसिला तेज होता नजर आ रहा है।



