सुविधाओं की कमी से अटके दर्जनभर नर्सिंग कॉलेज, 138 को सशर्त मान्यता; प्रवेश प्रक्रिया अब तक ठप

रायपुर/ छत्तीसगढ़ में नर्सिंग पाठ्यक्रमों में दाखिले की अंतिम तिथि नजदीक है, लेकिन अब तक प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (CNC) ने 138 नर्सिंग कॉलेजों को सशर्त मान्यता दी है, वहीं दर्जनभर कॉलेज सुविधाओं के अभाव में मान्यता से वंचित रह गए हैं। इस देरी से कॉलेज प्रबंधन के साथ-साथ विद्यार्थियों की चिंता भी बढ़ गई है।

138 कॉलेजों को मिली सशर्त मान्यता

काउंसिल ने 4 सितंबर को सूची जारी कर 138 कॉलेजों को मान्यता प्रदान की है। यह मान्यता शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए प्रभावी होगी। हालांकि यह सशर्त है, जिसमें भारतीय उपचर्या परिषद (INC) के मापदंडों के अनुरूप भवन, हॉस्टल, स्टाफ और प्रशिक्षण सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होंगी।
साथ ही, मान्यता मिलने के छह माह के भीतर कॉलेजों को परिषद के निरीक्षण हेतु आवेदन करना होगा।

किराए की बिल्डिंग पर चल रहे कॉलेजों पर रोक

करीब एक दर्जन कॉलेजों की मान्यता रोक दी गई है। कारण यह है कि ये कॉलेज आज भी किराए की बिल्डिंग में संचालित हो रहे हैं और आवश्यक सुविधाएं नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ संस्थान तो पिछले 10 साल से किराए की इमारतों पर ही निर्भर हैं। पूर्व में निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक स्थायी भवन नहीं बनाए गए।

विद्यार्थियों की बढ़ रही परेशानी

इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) ने साफ किया है कि प्रवेश की अंतिम तिथि 30 सितंबर ही रहेगी, इसमें कोई बढ़ोत्तरी नहीं की जाएगी। अब केवल 21 दिन शेष हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में नर्सिंग प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। इससे विद्यार्थियों में असमंजस है और कई छात्र दूसरे राज्यों का रुख करने लगे हैं।

क्लीनिकल प्रशिक्षण शुल्क पर विवाद

इस बीच चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने निजी नर्सिंग कॉलेजों को नया आदेश जारी किया है। इसके तहत प्रत्येक कॉलेज को प्रशिक्षण की अनुमति शुल्क 200 रुपये प्रति सीट, प्रति माह, प्रति बैच, प्रति छात्र, प्रतिवर्ष एकमुश्त राशि संबंधित समिति (रोगी कल्याण समिति/स्वशासी समिति/जीवनदीप समिति) के खाते में जमा करनी होगी।

छत्तीसगढ़ निजी नर्सिंग महाविद्यालय संघ ने इस पर आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि कॉलेजों की आय का स्रोत केवल प्रवेशित छात्रों से ली गई फीस है। ऐसे में रिक्त सीटों पर भी शुल्क जमा कराना अन्यायपूर्ण है।

नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता को लेकर उठे सवाल और प्रवेश प्रक्रिया में हो रही देरी से विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं राज्य से बाहर दाखिला लेने के लिए मजबूर हो सकते हैं।