ओशो- मैंने सुना है कि एक आदमी बहुत उदास और दुखी बैठा है। उसकी एक बड़ी होटल है। बहुत चलती हुई होटल है। और एक मित्र उससे पूछता है कि तुम इतने दुखी और उदास क्यों दिखाई पड़ते हो कुछ दिनों से? कुछ धंधे में कठिनाई, अड़चन है? उसने कहा, बहुत अड़चन है। बहुत घाटे […]Read More
भिलाई/ समाजसेवी और सिम्पलेक्स कास्टिंग लिमिटेड एमडी डॉक्टर संगीता शाह का पांच दिवसीय अभियान एक रक्षा सूत्र भारत की सेना के नाम” के 19 अगस्त से 23 अगस्त तक जारी रहेगा। अभियान में हिस्सा बनने डॉ संगीता शाह ने सभी से अपील की है कि हमारा हर दिन खुशियों भरा है, हर शाम में सुकून […]Read More
स्वधर्म की खोज श्रीभगवानुवाच लोकेऽस्मिन्द्विविधा निष्ठा पुरा प्रोक्ता मयानघ। ज्ञानयोगेन सांख्यानां कर्मयोगेन योगिनाम्।।३।। ओशो- इस प्रकार अर्जुन के पूछने पर भगवान श्री कृष्ण बोले, हे निष्पाप अर्जुन, इस लोक में दो प्रकार की निष्ठा मेरे द्वारा पहले कही गई है: ज्ञानियों की ज्ञानयोग से और योगियों की निष्काम कर्मयोग से।कहते हैं कृष्ण, निष्पाप अर्जुन! संबोधन […]Read More
भिलाई/ जल संसाधन विभाग में कार्यपालन अभियंता टी आर मेश्राम तथा शासकीय मोहन लाल गुप्ता महाविद्यालय खुर्सीपार में प्राध्यापक श्रीमती अनिता मेश्राम की सुपुत्री कु नुपुर मेश्राम जिसने वैदेही चिकित्सा महाविद्यालय बैंगलोर से MBBS की परीक्षा विशेष योग्यता से उत्तीर्ण की तथा वर्तमान में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय हॉस्पिटल ,डिब्रुगढ़ असम में जनरल surgury में पोस्ट […]Read More
प्रश्न- सभी धर्म चाहते है उनका धर्म छोडकर कोई दूसरे धर्म मे न जाये-लेकिन दूसरे धर्म के लोग उनके धर्म मे आ जाये-क्यो ? ओशो- यह देश हिन्दू मतांध लोगों के हाथ का शिकार हुआ जा रहा है। चेष्टा यह है कि कोई हिन्दू किसी दूसरे धर्म में न जा सके। लेकिन कोई नहीं पूछता […]Read More
ओशो- आतंकवाद की घटना निश्चित रूप से उस सबसे जुड़ी है, जो समाज में हो रहा है। समाज बिखर रहा है। उसकी पुरानी व्यवस्था, अनुशासन, नैतिकता, धर्म सब कुछ गलत बुनियाद पर खड़ा मालूम होता है। लोगों की अंतरात्मा पर अब उसकी कोई पकड़ नहीं रही।आतंकवाद का मतलब इतना ही है कि लोग मानते हैं […]Read More
ओशो- रमण की समाधि समझने जैसी है। ज्यादा उम्र उनकी न थी। ज्यादा होती तो शायद समाधि मिलती भी न। ज्यादा उम्र क्या हो जाती है लोगों की, अनुभव का कचरा खूब इकट्ठा हो जाता है। फिर उस कचरे से छूटना बड़ा मुश्किल होता है। ज्यादा उम्र क्या हो जाती है, लोग ज्ञानी हो जाते […]Read More
ओशो- तुम्हारा धर्म आत्मवंचना है। पृथ्वी पर जो इतने मंदिर—मस्जिद दिखाई पड़ते हैं, वे तुम्हारे धोखे का विस्तार हैं। जिस दिन तुम्हें यह दिखाई पड़ेगा, उस दिन तुम्हारी आंख भीतर लौटनी शुरू होगी। उस दिन तुम असली मंदिर खोजोगे। वह मंदिर तुम हो। इसलिए कबीर कहते हैं:“मो को कहां ढूंढो रे बंदे, मैं तो तेरे […]Read More
ओशो- मोरारजी देसाई जब जवान थे तो एक लड़की से शादी करना चाहते थे। पिता पक्ष में नहीं थे। बात इतनी बिगड़ गई कि पिता ने कुएं में कूद कर आत्महत्या कर ली!मोरारजी को बहुत लोगों ने समझाया कि शादी तो अब तुम कर ही लेना जिससे करनी है, लेकिन कम से कम अभी कुछ […]Read More
ओशो : प्रेम में ईष्या हो तो प्रेम ही नहीं है; फिर प्रेम के नाम से कुछ और ही रोग चल रहा है। ईष्या सूचक है प्रेम के अभाव की।यह तो ऐसा ही हुआ, जैसे दीया जले और अंधेरा हो। दीया जले तो अंधेरा होना नहीं चाहिए। अंधेरे का न हो जाना ही दीए के […]Read More



