ओशो- एक बार एक राजा के मन में आया कि यदि वह इन तीन प्रश्नों के उत्तर खोज लेगा तो उसे कुछ और जानने की आवश्यकता नहीं रह जायेगी। राजा ने यह घोषणा करवाई कि जो भी व्यक्ति उपरोक्त प्रश्नों के सही उत्तर देगा उसे बड़ा पुरस्कार दिया जाएगा. यह सुनकर बहुत से लोग राजमहल […]Read More
स्त्रियां अपने शरीर की उतनी फिक्र नहीं करती हैं, जितनी
ओशो- धन, पद, बहुत स्थूल आकर्षण हैं। वे आकर्षण वैसे ही हैं, जैसे चुंबक के पास लोहा खिंचता है। ऐसे ही हम खिंचे चले जाते हैं। ध्यान रखना, आप चुंबक नहीं हैं। जब आप धन की तरफ खिंचते हैं, तो ध्यान रखना, धन आपकी तरफ कभी नहीं खिंचता है। आप ही धन की तरफ खिंचते […]Read More
ओशो- कोई इच्छाओ को दबाये बिना उन्हे कैसे काट सकता है? इच्छाएं सपने हैं, वे वास्तविकताएं नहीं हैं। तुम उन्हें परिपूर्ण नहीं कर सकते और तुम उन्हें दबा नहीं सकते, क्योंकि तुम्हारे किसी निश्रित चीज को परिपूर्ण करने के लिए उसके वास्तविक होने की जरूरत होती है। तुम्हारे किसी निशित चीज को दबाने के लिए […]Read More
•बच्चों को अपने माता पिता का मोबाइल number हमेशा याद रखना चाहिए । •अपनी निजी जानकारी जैसे फोटो,पासवर्ड, मोबाइल नंबर किसी अनजान व्यक्ति के साथ शेयर ना करें । भिलाई/ हमारी बेटियां हमारी शान है और वे ही प्रदेश के उज्जवल भविष्य की नींव हैं और इनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। जिस समाज की बेटियां […]Read More
ओशो- मैंने सुना है, एक अंधा और एक लंगड़ा दो मित्र थे—दोनों भिखारी। और दोनों की मित्रता एकदम जरूरी भी थी, क्योंकि एक अंधा था और एक लंगड़ा था। लंगड़ा चल नहीं सकता था, अंधा देख नहीं सकता था। तो अंधा चलता था और लंगड़ा देखता था। लंगड़ा अंधे के कंधों पर बैठ जाता, दोनों […]Read More
ओशो- अर्जुन का मन हो कितना ही जटिल, कितनी ही हों द्वंद्व की पर्तें भीतर, पर अर्जुन सरल व्यक्तित्व है। जटिलता है बहुत, लेकिन अपनी जटिलता के प्रति किसी धोखे में अर्जुन नहीं है। और अपनी जटिलता को भी प्रकट करने में स्पष्ट और ईमानदार है। शायद यही उसकी योग्यता है कि कृष्ण का संदेश […]Read More
ओशो- सुना है मैंने कि चीन में एक बहुत बड़ा धनुर्धर हुआ। उसने जाकर सम्राट को कहा कि अब मुझे जीतने वाला कोई भी नहीं है। तो मैं घोषणा करना चाहता हूं राज्य में कि कोई प्रतियोगिता करता हो, तो मैं तैयार हूं। और अगर कोई प्रतियोगी न निकले–या कोई प्रतियोगी निकले, तो मैं स्पर्धा […]Read More
दुर्ग / उप सचिव भारत शासन, मंत्रालय महिला एवं बाल विकास विभाग दयाशंकर ने विगत 28 अगस्त को दुर्ग जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केन्द्रों एवं संस्थाओं का निरीक्षण किया । निरीक्षण के दौरान सर्वप्रथम एकीकृत बाल विकास परियोजना पाटन केआंगनबाड़ी केन्द्र पाटन क्रमांक 12 का निरीक्षण किया। यहां पर आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति, […]Read More
ओशो- अखबार उठा कर देखें, तो दो कौड़ी का आदमी किसी पद पर हो जाए, तो अखबार के लिए भगवान हो जाता है। वही आदमी कल अखबार से, दुनिया..पद से नीचे उतर जाए, फिर उसका पता लगाना मुश्किल है कि वह कहां है। कोई पता नहीं चलेगा। बस सत्ता का हमारे मन में इतना आदर […]Read More
प्रश्न. मैंने सैंकड़ों सबंध बनाये, शारीरिक और मानसिक दोनों, लेकिन आखिर में बढ़ती हुई अतृप्ति के सिवाय कुछ भी हाथ नहीं आया। मैं कुछ पकड़ नहीं पाती, सब हाथ से फिसल-फिसल जाता है और मैं बेबस और भयभीत खड़ी देखती रहती हूं; ऐसा क्यों है ?- ओशो- तुम्हारा कुछ कसूर नहीं। इस जगत के सारे […]Read More



