कहते हैं, परमात्मा को बड़ी दया आई। पहले आती रही होगी अब नहीं आती। क्योंकि परमात्मा भी थक गया दया कर—कर के, कुछ सार नहीं। आदमी कुछ ऐसा ह,ऐ कि तुम दया करो तो भी उस तक दया पहुंचती नहीं। परमात्मा भी थक गया होगा। पर यह पुरानी कहानी है, दया आ गई। परमात्मा मौजूद हुआ, प्रगट हुआ। उसने उस दिन सोचा कि आज दोनो को आशीर्वाद दे दूंगा। अंधे के पास जा कर कहूंगा मांग ले जो तुझे मांगना है। स्वभावत: अंधा मांगेगा कि मुझे आंखें दे दो, क्योंकि वही उसकी पीड़ा है,। लंगड़े से कहूंगा, जो तुझे मांगना है तू मांग ले। वह मांगेगा पैर, उसको पैर दे दूंगा। अब दोनों को स्वतंत्र कर देना उचित है।