‘भिलाई-चरौदा निगम विवाद’, “आयुक्त हटाओ” की मांग तेज: पार्षदों ने लगाया कमीशनखोरी और उपेक्षा का आरोप, विधायक की चुप्पी पर भी उठे सवाल
भिलाई-चरौदा निगम में बढ़ता असंतोष, पार्षद बोले — जनता परेशान, अधिकारी मस्त!
भिलाई-चरौदा नगर पालिक निगम में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। निगम आयुक्त डी.एस. राजपूत के खिलाफ पार्षदों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। जानकारी के मुताबिक, पार्षदों ने गंभीर आरोप लगाते हुए विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा को लिखित शिकायत सौंपकर आयुक्त को तत्काल हटाने की मांग की थी।
बताया जा रहा है कि यह शिकायत पत्र दिनांक 12 सितंबर 2025 को विधायक को सौंपा गया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। इससे नाराज पार्षदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी असंतोष व्याप्त है।
पार्षदों का आरोप — “बिना कमीशन कोई काम नहीं, जनता की समस्याएं फाइलों में दबाई जा रही हैं।”
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि आयुक्त डी.एस. राजपूत न तो पार्षदों के आवेदन पर ध्यान देते हैं और न ही निगम क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं का समाधान करते हैं। यहां तक कि पार्षदों के फोन कॉल तक रिसीव नहीं किए जाते।
पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि निगम में अधिकांश कार्य “कमीशन संस्कृति” के तहत संचालित हो रहे हैं। जिन कार्यों में कथित रूप से कमीशन नहीं मिलता, उन फाइलों को लंबित रखा जाता है और संबंधित लोगों पर दबाव बनाया जाता है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आयुक्त की निगम कार्यालय में नियमित उपस्थिति तक नहीं रहती। कई बार वे केवल कुछ मिनटों के लिए कार्यालय पहुंचते हैं और फिर बाहर चले जाते हैं, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
“नगर की समस्याओं से ज्यादा आखिर निगम आयुक्त की चिंता क्यों?” — यह सवाल अब खुद सत्ताधारी खेमे के पार्षद भी उठाने लगे हैं।
सूत्रों की मानें तो निगम के कई पार्षद अब आयुक्त के खिलाफ उग्र आंदोलन और धरना-प्रदर्शन की तैयारी में जुट गए हैं। पार्षदों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
वहीं राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आखिर ऐसी कौन सी वजह है, जिसके चलते शिकायतों के बावजूद आयुक्त पर कार्रवाई नहीं हो पा रही। विपक्ष भी अब इस मुद्दे को लेकर सरकार और स्थानीय नेतृत्व पर निशाना साधने की तैयारी में है।
फिलहाल इस पूरे मामले ने भिलाई-चरौदा निगम की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




