मरवाही नगर पंचायत की बदहाल व्यवस्था उजागर — पार्षदों का फूटा गुस्सा, प्रशासन की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

मरवाही / प्रयास कैवर्त

मरवाही नगर पंचायत की अव्यवस्था लगातार बढ़ती जा रही है और अब स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि जनता से लेकर जनप्रतिनिधियों तक का धैर्य जवाब दे गया है। नगर में मूलभूत सुविधाओं के अभाव और अधिकारियों की घोर लापरवाही ने विकास के सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है। करोड़ों रुपये विकास के नाम पर खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।

शौचालय बंद, नालियां जाम, गंदगी का साम्राज्य

नगर पंचायत क्षेत्र में बने सार्वजनिक शौचालय महीनों से बंद पड़े हैं, जिसके चलते लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नालियों की सफाई न होने से जगह-जगह जलजमाव की स्थिति बनी हुई है, और सड़कों पर गंदगी का साम्राज्य फैल चुका है। कई मोहल्लों में निकासी व्यवस्था ठप होने से गंदा पानी घरों और दुकानों के सामने जमा हो रहा है।

जर्जर यात्री प्रतीक्षालय बना खतरा

यात्री प्रतीक्षालय, जो यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया गया था, आज खुद खस्ताहाल स्थिति में खड़ा है। भवन की दीवारें टूटकर गिर रही हैं, छतों में लगे पंखे जर्जर होकर टूट चुके हैं, और पूरी इमारत किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। लोगों का कहना है कि सुविधा के नाम पर बनी संरचनाएं अब असुरक्षा का कारण बन चुकी हैं।

जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन पर साधा निशाना

नगर पंचायत के पार्षद अमर गुप्ता ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा—

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से देश को स्वच्छ एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा अभियान चला रहे हैं, और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने के दावे करते हैं। लेकिन मरवाही नगर पंचायत के अधिकारी इन योजनाओं को फाइलों में दबाकर शासन की छवि को नुकसान पहुँचा रहे हैं।”

पार्षद गुप्ता के अनुसार नगर की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद अधिकारी न तो निरीक्षण के लिए आते हैं और न ही सुधार के प्रयास करते हैं। उन्होंने उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल

मीडिया ने जब इन समस्याओं पर सक्षम अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की, तो उन्होंने जवाब देने से साफ इंकार कर दिया। यह रवैया स्वयं प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

विकास बजट पर बड़ा सवाल

मुख्यमंत्री द्वारा नगरों के समग्र विकास के लिए करोड़ों की राशि बजट में स्वीकृत की जाती है, लेकिन मरवाही में इनका प्रभाव नगण्य है। नागरिक आज भी गंदगी, टूटी सड़कें, बंद शौचालय और अव्यवस्थित सफाई व्यवस्था जैसी बुनियादी परेशानियों से जूझ रहे हैं।

अब उम्मीद शासन-प्रशासन के हस्तक्षेप से

जनता का सवाल है कि आखिर कब सुधरेगी मरवाही नगर पंचायत की व्यवस्था? क्या प्रशासन अब कार्रवाई करेगा या फिर लोग इसी बदहाली के साथ जीने को मजबूर रहेंगे?
आने वाला समय ही तय करेगा कि इस शहर के हालात सुधरेंगे या नहीं।

(प्रयास कैवर्त / मरवाही)