गतका: सिर्फ मार्शल आर्ट नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक धरोहर, भिलाई में राष्ट्रीय गतका चैंपियनशिप का भव्य आगाज़ — सिख जंगजू परंपरा का जीवंत प्रदर्शन
सांसद विजय बघेल बोले – “गतका हमारी गौरवशाली विरासत का प्रतीक है, युवाओं को इससे जोड़ना गर्व की बात”
भिलाई नगर/ सिख इतिहास की अमर जंगजू परंपरा और भारतीय संस्कृति की वीरता को साकार करती 13वीं राष्ट्रीय गतका चैंपियनशिप का शुभारंभ शुक्रवार को गुरु नानक इंग्लिश सीनियर सेकेंडरी स्कूल, भिलाई में हुआ।
यह तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता नेशनल गतका एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NGAI) द्वारा न्यू गतका स्पोर्ट्स एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ के सहयोग से आयोजित की जा रही है।
गतका: सिर्फ मार्शल आर्ट नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक धरोहर
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में दुर्ग सांसद विजय बघेल ने किया। उनके साथ मंच पर पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडे, NGAI अध्यक्ष हरजीत सिंह ग्रेवाल, छत्तीसगढ़ सिख पंचायत अध्यक्ष जसबीर सिंह चहल, न्यू गतका एसोसिएशन अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह छोटू, महासचिव जसवंत सिंह खालसा और वित्त सचिव मलकीत सिंह लल्लू सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में सांसद बघेल ने कहा—
“गतका केवल युद्ध कला नहीं, बल्कि यह हमारे गौरवशाली अतीत और सिख परंपरा की अजेय भावना का प्रतीक है। ऐसी स्वदेशी कलाओं को बढ़ावा देने से न केवल संस्कृति का संरक्षण होता है बल्कि युवाओं में साहस, अनुशासन और भक्ति के गुण भी विकसित होते हैं।”
“छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण” — प्रेम प्रकाश पांडे
विशिष्ट अतिथि प्रेम प्रकाश पांडे ने कहा कि इस प्रतियोगिता की मेजबानी छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा—
“गतका जैसी प्राचीन कला फिटनेस, अनुशासन और एकता का संदेश देती है। यह न सिर्फ खेल है बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक सद्भाव की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान करती है।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतका को पहुँचाने की तैयारी
एनजीएआई एवं वर्ल्ड गतका फेडरेशन के अध्यक्ष हरजीत सिंह ग्रेवाल ने बताया कि उनका उद्देश्य गतका को एक पारंपरिक कला के साथ-साथ आधुनिक खेल के रूप में पहचान दिलाना है।
उन्होंने कहा—
“हम चाहते हैं कि निकट भविष्य में गतका को ओलंपिक जैसे वैश्विक खेल आयोजनों में भी शामिल किया जाए। भारत के खिलाड़ी इस मंच से अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी करेंगे।”
12 राज्यों से आए 500 खिलाड़ी, विजेताओं को मिलेगा विशेष सम्मान
आयोजन समिति के प्रमुख इंद्रजीत सिंह छोटू और जसवंत सिंह खालसा ने बताया कि प्रतियोगिता में देशभर के 12 राज्यों से 500 से अधिक खिलाड़ी (लड़कें और लड़कियाँ दोनों) भाग ले रहे हैं।
रविवार, 12 अक्टूबर को समापन समारोह में विजेताओं को पदक और प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।
इंद्रजीत सिंह छोटू ने घोषणा की—
“छत्तीसगढ़ के स्वर्ण पदक विजेताओं को खेल सुविधाएँ और नकद प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया जाएगा।”
सिख समाज और संस्थाओं का व्यापक सहयोग
इस आयोजन को सफल बनाने में कई गुरुद्वारों और सिख संस्थाओं का पूरा सहयोग रहा।
इनमें प्रमुख हैं —
गुरुद्वारा बेचे जानकी जी (जोन-2, खुर्सीपार), गुरुद्वारा श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी (कैंप-2), गुरुद्वारा श्री गुरु अर्जुन देव जी (हाउसिंग बोर्ड), गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर जी (कैंप), गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह जी (सुपेला) और अन्य प्रमुख गुरुद्वारे।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ सिख पंचायत, युवा सेवा समितियाँ, सिख यूथ फोरम, पंजाबी कल्चरल एंड वेलफेयर एसोसिएशन, और गुरु नानक सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
गतका – भारत की वीरता और सिख अध्यात्म का संगम
गतका केवल हथियार चलाने की कला नहीं, बल्कि यह आत्म-नियंत्रण, सेवा, अनुशासन और शौर्य का प्रतीक है।
भिलाई में आयोजित यह चैंपियनशिप न केवल खिलाड़ियों की प्रतिस्पर्धा का मंच है बल्कि सिख इतिहास की उस विरासत को जीवित रखने का माध्यम है, जिसने देश को शौर्य और समर्पण का अर्थ सिखाया।l



