रायपुर के नामी अस्पताल पर गंभीर आरोप: मरीज के परिजनों से 6 लाख की वसूली, कार्रवाई की अनुशंसा
रायपुर/ राजधानी के मित्तल हॉस्पिटल पर बड़ा आरोप लगा है। जशपुर जिले के एक मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि अस्पताल ने न केवल आयुष्मान कार्ड से करीब 3 लाख रुपये ब्लॉक किए, बल्कि उतनी ही राशि नकद में भी वसूली — और इसकी कोई बिलिंग या रसीद नहीं दी गई।
शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया
इस पूरे मामले की शिकायत मरीज के परिजनों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMO) रायपुर से की। जांच के बाद सीएमओ कार्यालय ने संचालक स्वास्थ्य सेवाएं को पत्र लिखकर मित्तल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज को तीन महीने के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से निलंबित करने की अनुशंसा की है।
वीडियो सबूत के आधार पर बनी कार्रवाई की सिफारिश
स्वास्थ्य विभाग को मिले वीडियो साक्ष्यों के आधार पर यह अनुशंसा की गई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि वीडियो में अस्पताल प्रबंधन द्वारा ली गई राशि के कुछ सबूत मौजूद हैं, जिसके बाद कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
परिजनों का आरोप — “शिकायत वापस लेने के लिए दी गई रिश्वत की पेशकश”
मरीज के परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि शिकायत वापस लेने के एवज में 60 हजार रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी। परिवार का कहना है कि उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया, लेकिन अब उन्हें धमकी दी जा रही है कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी कार्रवाई नहीं होने देंगे।
स्वास्थ्य विभाग करेगा विस्तृत जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। विभाग का कहना है कि यदि आरोप सही पाए गए तो न केवल अस्पताल पर कार्रवाई होगी, बल्कि संबंधित अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाएगी।
मित्तल अस्पताल प्रबंधन की सफाई का इंतज़ार
वहीं, इस विवाद पर अब तक मित्तल अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।
यह मामला न केवल आयुष्मान योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि निजी अस्पतालों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया कितनी कमजोर है। यदि ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं हुई, तो गरीब मरीजों के हक की योजनाएं सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएंगी।



