दुर्ग निगम में हाईवोल्टेज ड्रामा : महापौर अल्का बाघमार पर अधिकारियों को घंटों रोकने का आरोप, पुलिस पहुंची निगम दफ्तर

 दुर्ग निगम में हाईवोल्टेज ड्रामा : महापौर अल्का बाघमार पर अधिकारियों को घंटों रोकने का आरोप, पुलिस पहुंची निगम दफ्तर

दुर्ग नगर निगम एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। महापौर अल्का बाघमार और निगम अधिकारियों के बीच शुक्रवार को ऐसा तनावपूर्ण माहौल बना कि मामला पुलिस तक पहुंच गया। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें महापौर के केबिन में घंटों बैठाकर रखा गया और बाहर जाने नहीं दिया गया। वहीं दूसरी ओर महापौर ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।

निगम दफ्तर में बढ़े विवाद के बाद एडिशनल एसपी, सीएसपी और दो थानों की पुलिस टीम मौके पर पहुंची।

भूमिपूजन कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक पूरा विवाद 14 मई को उरला हाईस्कूल में आयोजित भूमिपूजन कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ। कार्यक्रम में अतिरिक्त कक्ष और हॉल निर्माण का शिलान्यास किया गया था, जिसमें शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे।

कार्यक्रम के दौरान महापौर अल्का बाघमार ने मंच से ही अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महापौर ने यह भी कहा कि सरकार फंड उपलब्ध करा रही है, लेकिन अधिकारी समय पर काम पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

तीन अधिकारियों को बुलाकर मांगा जवाब

शुक्रवार को महापौर ने निगम कार्यालय में आरईएस विभाग के कार्यपालन अभियंता जेके मेश्राम, एसडीओ सीके सोने और मंडी बोर्ड के एसडीओ प्रवीण पांडे को चर्चा के लिए बुलाया। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान निर्माण कार्यों में देरी और कथित अनियमितताओं को लेकर तीखी बहस हुई।

सूत्रों के अनुसार महापौर ने अधिकारियों से जवाब तलब किया, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर माहौल और गरमा गया। इसी दौरान अधिकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें केबिन से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

करीब तीन घंटे चला तनाव

बताया जा रहा है कि निगम कार्यालय में लगभग तीन घंटे तक लगातार बहस और बातचीत का दौर चलता रहा। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब एक अधिकारी ने पुलिस को सूचना दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया और वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में टीम नगर निगम कार्यालय पहुंची।

पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और संबंधित अधिकारियों को महापौर कक्ष से बाहर निकाला। घटना के बाद निगम परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और पूरे घटनाक्रम की चर्चा शहरभर में होने लगी।

महापौर ने आरोपों को बताया गलत

विवाद बढ़ने के बाद महापौर अल्का बाघमार ने मीडिया के सामने अपनी सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी को बंधक नहीं बनाया गया था। उनके मुताबिक बैठक सामान्य प्रशासनिक चर्चा का हिस्सा थी और विकास कार्यों में लापरवाही को लेकर जवाब मांगा गया था।

महापौर ने कहा कि जनता के काम समय पर पूरे हों, यह सुनिश्चित करना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग मामले को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

लगातार विवादों में घिरा निगम प्रशासन

पिछले कुछ समय से दुर्ग निगम लगातार विवादों में बना हुआ है। इससे पहले भी महापौर अल्का बाघमार के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिनमें वे अधिकारियों और कर्मचारियों पर नाराजगी जाहिर करती नजर आई थीं। अब अधिकारियों को कथित रूप से रोककर रखने के आरोपों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।