सम्मान तो वहां है जहां पद है, और पद वहां है जहां राज्य है। लेकिन सारा ढांचा हमारे चिंतन का ऐसा है कि सब पीछे है, और सबके ऊपर राज्य है, सबके ऊपर राजनीति है। राजनीतिज्ञ जाने-अनजाने शिक्षक के द्वारा अपनी विचार-स्थिति को, अपनी धारणाओं को बच्चों में प्रवेश करवाता रहता है। धार्मिक भी करता रहा है-यही! धर्म-शिक्षा के नाम पर यही चलता रहा है कि हर धर्म यह कोशिश करता है, बच्चों के मन में अपनी धारणाओं को प्रवेश करा दे, चाहे वे सत्य हों, चाहे असत्य हों। और उस उम्र में प्रवेश करवा दे जब कि बच्चे में कोई सोच-विचार नहीं होता है~ ओशो