ओशो- बुद्ध कहते थे कि जिसे सादृश्य-योग साधना हो, वह पहले तो तीन महीने मरघट पर जाकर निवास करे। सादृश्य-योग साधना हो, तो पहले तीन महीने मरघट पर निवास करे। जब कोई भिक्षु आता, बुद्ध कहते, जा तीन महीने मरघट पर रह। वह कहता, इससे क्या होगा? मैं योग साधने आया! बुद्ध कहते, पहले जरा मरघट पर तीन महीने रहकर आ। वह कहता, वहां क्या करूंगा?
तो बुद्ध कहते, जब भी कोई मुर्दा आए, तो जानना कि ऐसा ही एक दिन मैं भी आऊंगा। जब उसको जलाया जाए, तो जानना कि ऐसा ही एक दिन मैं भी जलाया जाऊंगा। जब उसका बेटा खोपड़ी तोड़े, तो जानना कि मेरा बेटा एक दिन खोपड़ी तोड़ेगा। जब सब लोग उसको जला-बुझाकर जाने लगें, तो जानना कि एक दिन लोग मुझे इसी तरह जला-बुझाकर चले जाएंगे।