लेकिन एक दिन रास्ते पर उसे देखा तो वह बड़ा शांत चला जा रहा था। उसकी आंखों में भी बड़ी शांति मालूम पड़ती थी, उसके चेहरे पर भी बड़ा प्रकाश दिखता था। तो उस पादरी ने उसे रोका और कहा कि सुनो, आए नहीं दुबारा? उसने कहाः मैं तो आता, लेकिन एक बाधा आ गई। क्या बाधा आ गई? उसने कहा कि मैं निरंतर प्रार्थना में, शांति में, मौन में रहने लगा ताकि चित्त शुद्ध हो जाए। अपने विकारों को विसर्जित करने लगा। कोई दो महीने बीतने पर एक रात मुझे सपने में भगवान ने दर्शन दिए। और उन्होंने मुझसे पूछा कि इतनी तपश्चर्या, इतनी साधना किसलिए कर रहा है? तो मैंने कहा कि वह जो चर्च है हमारे गांव में मैं उसमें प्रवेश करना चाहता हूं ताकि आपके दर्शन कर सकूं। तो भगवान ने मुझसे कहाः तू बिल्कुल पागल है, यह काम छोड़ दे, यह काम बिल्कुल असंभव है, मैं खुद दस साल से कोशिश कर रहा हूं वह पादरी मुझे चर्च में घुसने नहीं देता। तो दस साल से में खुद कोशिश कर-कर के हार गया हूं, तू गरीब नीग्रो तुझे कौन घुसने देगा, मुझे भी वह घुसने नहीं देता बाहर से ही लौटा देता है कि हटो यहां तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है। यह सपने में भगवान ने उस नीग्रो को कहा। भगवान ने अतिशयोक्ति नहीं की। शायद डर के कारण दस वर्ष कहे कहीं नीग्रो घबड़ा न जाए। लेकिन मुझसे भी मेरे सपने में उस भगवान ने कहा, कि दस वर्ष नहीं मैं दस हजार साल से कोशिश कर रहा हूं।