रामकृष्ण को कमेटी ने बुलाया और कहा कि यह क्या कर रहे हैं आप? हमने सुना है कि फूल आप पहले सूंघ लेते हैं,फिर परमात्मा को चढ़ाते हैं, और भोग आप पहले खुद लगा लेते हैं, फिर परमात्मा को चढाते है? रामकृष्ण ने कहा, हाँ,क्योंकि मैंने मेरी मां को देखा है, वह खाना बनाती थी तो पहले खुद चख लेती थी फिर मुझे देती थी। क्योंकि वह कहती थी कि पता नहीं, तुझे देने योग्य बना भी कि नहीं! तो मैं बिना चखे नहीं चढ़ा सकूंगा, और फूल जब तक मैं न सूंघ लूं तो मैं कैसे चढ़ाऊं? पता नहीं, सुगंधित है भी या नहीं।