तुम्हें घटना फिर से याद दिला दूं।अष्टावक्र के पिता वेदपाठी थे। वे सुबह रोज उठ कर वेद का पाठ करते। ख्यातिलब्ध थे, सारे देश में उनका नाम था। बड़े शास्त्रार्थी थे। और अष्टावक्र गर्भ में सुनता। एक दिन अचानक बोल पड़ा गर्भ से कि हो गया बहुत, इस तोता—रटन से कुछ भी न होगा। जाने बिना सत्य का कोई पता नहीं चलता—पढ़ो कितना ही वेद, शास्त्र सत्य नहीं है—सत्य तो अनुभव से उपलब्ध होता है।