पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर कथित आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट से सियासी बवाल, कांग्रेस ने थाने में खोला मोर्चा

 पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर कथित आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट से सियासी बवाल, कांग्रेस ने थाने में खोला मोर्चा

पुरानी भिलाई थाने में पहुंचा कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल, फेसबुक पोस्ट की जांच और प्रोफाइल संचालक पर कानूनी कार्रवाई की मांग

भिलाई-चरोदा। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल को लेकर सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक और अशोभनीय टिप्पणी किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। मामले को लेकर कांग्रेस ने पुलिस का दरवाजा खटखटाते हुए फेसबुक पोस्ट की जांच, डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित करने और संबंधित प्रोफाइल संचालक की पहचान कर उसके खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

19 सितंबर 2026 को इस संबंध में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी भिलाई-चरोदा के अध्यक्ष श्रीकांत वर्मा के नेतृत्व में कांग्रेस पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने पुरानी भिलाई थाना प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत के दौरान महापौर निर्मल कोसरे, सभापति कृष्णा चंद्राकर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी मौजूद रहे।

‘Nitish Mandal’ नाम की फेसबुक प्रोफाइल पर आरोप

कांग्रेस की शिकायत के अनुसार “Nitish Mandal” नाम से संचालित फेसबुक प्रोफाइल से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम का उल्लेख करते हुए कथित तौर पर आपत्तिजनक, अशोभनीय एवं अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर पोस्ट प्रसारित की गई।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सोशल मीडिया सार्वजनिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर सामग्री प्रसारित किए जाने की स्थिति में उसकी सत्यता और स्रोत की जांच बेहद जरूरी है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि पोस्ट जानबूझकर अपमानजनक या कानून का उल्लंघन करने वाली पाई जाती है, तो उसके जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

फेसबुक पोस्ट के डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित करने की मांग

कांग्रेस ने पुलिस से मामले की गंभीरता से जांच करने की मांग करते हुए संबंधित फेसबुक पोस्ट की URL, पोस्ट की तारीख और समय, कमेंट, शेयर एवं अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित करने का आग्रह किया है।

इसके साथ ही शिकायत में संबंधित फेसबुक प्रोफाइल का संचालन करने वाले व्यक्ति की वास्तविक पहचान सामने लाने और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

महापौर निर्मल कोसरे का रुख—सोशल मीडिया पर मर्यादा जरूरी

महापौर निर्मल कोसरे की ओर से मामले को लेकर शिकायत के अनुरूप यह रुख सामने आया कि सोशल मीडिया पर राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के संबंध में भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने पुलिस से शिकायत में उल्लेखित पोस्ट की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा जताई।

सभापति कृष्णा चंद्राकर—जांच के बाद सामने आए सच्चाई

सभापति कृष्णा चंद्राकर की ओर से कहा गया कि सोशल मीडिया पर किसी भी सामग्री को प्रसारित करने से पहले उसकी सत्यता और भाषा की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता पुलिस की जांच से स्पष्ट होगी और यदि जांच में किसी तरह का उल्लंघन सामने आता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

श्रीकांत वर्मा—आपत्तिजनक पोस्ट की निष्पक्ष जांच की मांग

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी भिलाई-चरोदा के अध्यक्ष श्रीकांत वर्मा ने पुलिस को सौंपे गए आवेदन के माध्यम से संबंधित फेसबुक पोस्ट और प्रोफाइल की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी सार्वजनिक व्यक्ति को लेकर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने की स्थिति में पोस्ट के स्रोत और संचालक की पहचान सामने आना जरूरी है। उन्होंने पुलिस से उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

कांकेर में भी सामने आया था ऐसा ही मामला

गौरतलब है कि 19 सितंबर को कांकेर जिले में भी कांग्रेस की ओर से भूपेश बघेल एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को लेकर कथित आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट के संबंध में पुलिस में शिकायत किए जाने की खबर सामने आई थी।

इसके बाद भिलाई-चरोदा में भी इसी तरह की शिकायत सामने आने से सोशल मीडिया पर राजनीतिक नेताओं के खिलाफ की जाने वाली कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर बहस तेज हो गई है।

अब पुलिस जांच पर टिकी नजर

फिलहाल भिलाई-चरोदा में कांग्रेस की शिकायत के बाद मामले की अगली दिशा पुलिस जांच से तय होगी। पुलिस द्वारा संबंधित फेसबुक पोस्ट, प्रोफाइल, डिजिटल साक्ष्यों और पोस्ट के वास्तविक संचालक की जांच किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पोस्ट किसने और किस उद्देश्य से प्रसारित की थी तथा उसमें किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। पुलिस जांच के निष्कर्ष के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।