मोबाइल चोरी के बाद बैंक खाते से 99,999 रुपये पार, एक साल बाद दर्ज हुई एफआईआर
हीरापुर सब्जी मार्केट में मोबाइल चोरी के बाद साइबर ठगी, अलग-अलग खातों में ट्रांसफर हुई रकम
राकेश कुमार की रिपोर्ट
रायपुर। हीरापुर सब्जी मार्केट में मोबाइल चोरी होने के बाद बैंक खाते से करीब एक लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। मोबाइल चोरी होने के बाद अज्ञात आरोपित ने पीड़ित के एक्सिस बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 99,999 रुपये दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। हैरानी की बात यह है कि घटना 28 अप्रैल 2025 की होने के बावजूद मामले में करीब एक साल बाद 23 अगस्त 2026 को कबीर नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
पुलिस के मुताबिक मारुति होम्स, हीरापुर निवासी सुजीत कुमार पाण्डेय (51) सिलतरा स्थित गोदावरी स्पात में इंजीनियर हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 28 अप्रैल 2025 को वह हीरापुर सब्जी मार्केट में खरीदारी करने गए थे। इसी दौरान उनका मोबाइल फोन चोरी हो गया। मोबाइल में बैंक खाते से संबंधित जरूरी जानकारी मौजूद थी।
मोबाइल चोरी होने के बाद पीड़ित ने एहतियात के तौर पर उसी मोबाइल नंबर का नया सिम भी ले लिया, लेकिन इसके बावजूद उनके एक्सिस बैंक, पंडरी शाखा के खाते से अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर दी गई।
जांच में सामने आया कि 28 अप्रैल को बंधन बैंक के एक खाते में 4,999 रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके बाद 30 अप्रैल को कोटक महिंद्रा बैंक के अलग-अलग खातों में 30 हजार, 40 हजार और 25 हजार रुपये भेजे गए। इस तरह कुल 99,999 रुपये पीड़ित के खाते से निकाल लिए गए।
रकम निकाले जाने की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत पुलिस से की। पुलिस अब उन बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटा रही है, जिनमें ठगी की रकम भेजी गई। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि मोबाइल चोरी होने के बाद आरोपित ने बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर किस तरह खाते से रकम ट्रांसफर की।
कबीर नगर पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपित के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंकिंग ट्रांजेक्शन, संबंधित खाताधारकों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपित तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
एक साल बाद एफआईआर से उठे सवाल
घटना के करीब एक साल बाद एफआईआर दर्ज होने से पुलिस की कार्रवाई की समय-सीमा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और ट्रांजेक्शन से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अब देखना होगा कि करीब एक लाख रुपये की इस साइबर ठगी के पीछे कौन लोग हैं और पुलिस उन्हें कब तक गिरफ्तार कर पाती है।




