जरवाय चौक के Hitachi ATM में तोड़फोड़ और चोरी, पुरानी भिलाई पुलिस की पेट्रोलिंग पर सवाल

 जरवाय चौक के Hitachi ATM में तोड़फोड़ और चोरी, पुरानी भिलाई पुलिस की पेट्रोलिंग पर सवाल

रातभर एटीएम में चलता रहा तोड़फोड़ और चोरी का खेल, पुलिस गश्त पर उठे गंभीर सवाल; डिस्प्ले-कैमरा तोड़े, करीब 30 हजार की तीन बैटरियां ले गए चोर

भिलाई। पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसकी तस्वीर जरवाय चौक स्थित Hitachi ATM में हुई तोड़फोड़ और चोरी की घटना ने सामने ला दी है। एटीएम को नुकसान पहुंचाने से लेकर अंदर घुसकर सामान चोरी करने तक की घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि रात के समय पुरानी भिलाई पुलिस की पेट्रोलिंग और गश्त व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।जरवाय चौक जैसे सार्वजनिक और आवाजाही वाले इलाके में स्थित एटीएम में अज्ञात आरोपी बेखौफ होकर पहुंचे। एटीएम के डिस्प्ले, कैमरे और बॉडी में तोड़फोड़ की गई। इसके बाद एटीएम के अंदर बने कमरे का ताला तोड़ा गया और वहां रखी तीन बैटरियां, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 30 हजार रुपये है, चोरी कर ली गईं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पुलिस की रात की गश्त कहां थी? यदि पुलिस की पेट्रोलिंग नियमित और प्रभावी थी तो आरोपियों को एटीएम में घुसकर तोड़फोड़ करने, कैमरा क्षतिग्रस्त करने और कमरे का ताला तोड़कर बैटरियां निकालने का इतना समय कैसे मिल गया? घटना के दौरान पुलिस की नजर इस गतिविधि पर क्यों नहीं पड़ी?

पुलिस गश्त पर सवाल, अपराधियों को खुली छूट?

शिकायत के अनुसार घटना 18 अगस्त की रात करीब 10 बजे से 19 अगस्त की सुबह करीब 11 बजे के बीच हुई। यानी आरोपियों के पास वारदात को अंजाम देने के लिए पर्याप्त समय था। एटीएम के बाहरी हिस्से में तोड़फोड़ के निशान हैं और अंदर बने कमरे का ताला तक तोड़ा गया।ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में पुलिस की पेट्रोलिंग केवल कागजों और रजिस्टरों तक सीमित है? अगर पुलिस वाहन रात में गश्त कर रहे थे तो जरवाय चौक जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर हुई इस वारदात की भनक तक क्यों नहीं लगी?

कैमरा तोड़ दिया, बैटरियां ले गए… पुलिस को पता तक नहीं चला!

घटना में एटीएम का कैमरा भी क्षतिग्रस्त किया गया। यानी आरोपी इस बात से वाकिफ नजर आते हैं कि सीसीटीवी उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। इसके बावजूद वे एटीएम में घुसे, तोड़फोड़ की और बैटरियां लेकर निकल गए।यह घटना पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक और गंभीर सवाल खड़ा करती है—जब अपराधी पुलिस की संभावित निगरानी से बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दे सकते हैं, तो आम नागरिक अपनी सुरक्षा को लेकर कितना आश्वस्त रहे?

घटना के बाद शिकायत, अब जांच के भरोसे कार्रवाई

Hitachi कंपनी के मास्टर फ्रेंचाइजी के रूप में दुर्ग शहर के विभिन्न स्थानों पर एटीएम का संचालन एवं देखरेख करने वाले संतोष सेन को 19 अगस्त को घटना की जानकारी दी गई। उनके बाहर होने के कारण उन्होंने 20 अगस्त को मौके पर पहुंचकर एटीएम की स्थिति देखी। इसके बाद कंपनी के संचालक को जानकारी दी गई और 23 अगस्त को पुरानी भिलाई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने BNS की धारा 305(a), 324(4) और 331(4) के तहत मामला दर्ज किया है।

लेकिन सवाल सिर्फ मामला दर्ज करने तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि वारदात को रोकने के लिए पुलिस की सक्रियता कहां थी? जरवाय चौक में एटीएम जैसी संवेदनशील जगह पर इतनी बड़ी तोड़फोड़ और चोरी हो गई और पुलिस को इसकी जानकारी शिकायत के बाद मिली—यह स्थिति निश्चित रूप से पुलिस की रात्रिकालीन गश्त व्यवस्था की समीक्षा की मांग करती है।

अब कार्रवाई के साथ जवाबदेही भी जरूरी

पुलिस द्वारा आरोपियों की तलाश के लिए आसपास के CCTV फुटेज खंगालने और अन्य पहलुओं की जांच किए जाने की बात सामने आई है। लेकिन क्षेत्र के लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि अगर पुलिस पहले से सतर्क होती और प्रभावी पेट्रोलिंग होती तो शायद वारदात को टाला जा सकता था।अब देखना होगा कि पुरानी भिलाई पुलिस इस मामले में सिर्फ अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मानती है या फिर रात की गश्त व्यवस्था में हुई कथित चूक की भी समीक्षा करती है।

क्योंकि सवाल सिर्फ तीन बैटरियों की चोरी का नहीं है। सवाल है—जरवाय चौक में एटीएम की सुरक्षा जब अपराधियों के भरोसे छोड़ दी जाए तो फिर पुलिस की पेट्रोलिंग आखिर किसके लिए और किस उद्देश्य से है?