ऑपरेशन विश्वास: तीन शिक्षण संस्थानों में पहुंची ट्रैफिक पुलिस, विद्यार्थियों को बताया—‘सड़क सुरक्षा ही सुरक्षित भविष्य की पहली सीढ़ी’

 ऑपरेशन विश्वास: तीन शिक्षण संस्थानों में पहुंची ट्रैफिक पुलिस, विद्यार्थियों को बताया—‘सड़क सुरक्षा ही सुरक्षित भविष्य की पहली सीढ़ी’

नाबालिगों के वाहन चलाने पर सख्ती, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन को भी दी जिम्मेदारी निभाने की समझाइश

भिलाई। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं नाबालिग वाहन चालकों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से यातायात पुलिस दुर्ग द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन विश्वास” के तहत रविवार को तीन प्रमुख शिक्षण संस्थानों में व्यापक यातायात जागरूकता अभियान चलाया गया। शंकराचार्य कॉलेज, जुनवानी, नारायणा स्कूल, बोरसी एवं निर्मला रानी पब्लिक स्कूल, खुर्सीपार में आयोजित कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन को यातायात नियमों एवं सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।

यातायात पुलिस ने विद्यार्थियों को समझाया कि सड़क पर छोटी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। सुरक्षित यातायात व्यवस्था के लिए नियमों का पालन करना केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी भी है।

18 वर्ष की उम्र और वैध लाइसेंस के बाद ही चलाएं वाहन

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने तथा वैध ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के बाद ही वाहन चलाना चाहिए। नाबालिग द्वारा वाहन चलाना कानूनन अपराध है। ऐसी स्थिति में वाहन चलाने वाले नाबालिग के साथ-साथ वाहन स्वामी एवं अभिभावकों के विरुद्ध भी मोटरयान अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

यातायात पुलिस ने विद्यालय प्रबंधन से भी अपील की कि किसी भी नाबालिग छात्र-छात्रा को दोपहिया अथवा चारपहिया वाहन लेकर विद्यालय आने की अनुमति न दी जाए।

हेलमेट और सीट बेल्ट को बनाया जाए आदत

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के मूल नियमों की जानकारी देते हुए कहा गया कि दोपहिया वाहन चलाते समय आईएसआई मार्क हेलमेट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें। चारपहिया वाहन में चालक एवं यात्रियों को सीट बेल्ट का उपयोग करना चाहिए।

पुलिस ने विद्यार्थियों को तेज गति से वाहन चलाने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने, तीन सवारी बैठाने, गलत दिशा में वाहन चलाने तथा अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन करने से बचने की सलाह दी। इन लापरवाहियों को सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल बताया गया।

अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन को भी दी जिम्मेदारी

यातायात पुलिस ने कहा कि नाबालिग बच्चों को वाहन उपलब्ध कराना अभिभावकों के लिए भी गंभीर जिम्मेदारी का विषय है। यदि कोई छात्र बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाकर विद्यालय पहुंचता है तो विद्यालय प्रबंधन द्वारा तत्काल उसके अभिभावकों को सूचना देकर आवश्यक समझाइश दी जानी चाहिए।

साथ ही स्कूलों में समय-समय पर सड़क सुरक्षा एवं यातायात जागरूकता संबंधी कार्यक्रम आयोजित करने तथा विद्यार्थियों और अभिभावकों को यातायात नियमों के पालन के लिए लगातार प्रेरित करने पर जोर दिया गया।

विद्यार्थियों से किया नियम पालन का आह्वान

अभियान के दौरान विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे स्वयं यातायात नियमों का पालन करें और अपने परिवार, मित्रों एवं आसपास के लोगों को भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जागरूक और अनुशासित युवा ही सुरक्षित यातायात व्यवस्था की मजबूत नींव तैयार कर सकते हैं।

यातायात पुलिस की अपील

यातायात पुलिस दुर्ग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को किसी भी परिस्थिति में वाहन चलाने की अनुमति न दें। बच्चों की सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें वैध ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के बाद ही वाहन संचालन की अनुमति दी जाए।

यातायात पुलिस दुर्ग द्वारा “ऑपरेशन विश्वास” के तहत जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में यातायात जागरूकता अभियान तथा नाबालिग वाहन चालकों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। अभियान का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और विद्यार्थियों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी, अनुशासन एवं सुरक्षा की भावना विकसित करना है।