सरकारी कर्मचारियों की कैशलेस इलाज योजना पर स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बड़े सुझाव, कहा— इलाज पूरी तरह निशुल्क हो, वेतन से न कटे प्रीमियम
29 जुलाई को मंत्रालय में प्रारूप पर हुई अहम बैठक, राज्य सरकार से कर्मचारी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नियमों में संशोधन की मांग
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित कैशलेस चिकित्सा योजना को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने कई महत्वपूर्ण सुझाव राज्य सरकार के समक्ष रखे हैं। संघ का स्पष्ट कहना है कि योजना का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब कर्मचारियों और उनके आश्रितों को बिना किसी आर्थिक बोझ के गुणवत्तापूर्ण एवं पूरी तरह निशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाए।
संघ के प्रदेश महामंत्री सैय्यद असलम ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य के लगभग पांच लाख अधिकारी-कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए विधानसभा के पिछले सत्र में 100 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान भी किया गया है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया के मार्गदर्शन में राज्य नोडल एजेंसी द्वारा योजना का प्रारूप तैयार किया गया है। इस प्रारूप पर कर्मचारी संगठनों से सुझाव प्राप्त करने और आवश्यक संशोधन पर चर्चा के लिए 29 जुलाई को मंत्रालय में अपर सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग दिव्या वैष्णव की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न कर्मचारी संगठनों के सुझावों पर विचार किया गया।
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने रखे ये प्रमुख सुझाव
प्रदेश महामंत्री सैय्यद असलम ने बताया कि संघ ने योजना को कर्मचारी हितैषी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदु सरकार के समक्ष रखे हैं—
- कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत किसी भी अस्पताल द्वारा मरीज या उसके परिजनों से किसी प्रकार की राशि की मांग नहीं की जाए तथा उपचार पूरी तरह निशुल्क हो।
- प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों के साथ-साथ राज्य के बाहर के मान्यता प्राप्त अस्पतालों को भी योजना में शामिल किया जाए।
- कर्मचारियों की सुविधा के लिए प्रत्येक जिले में हेल्प डेस्क स्थापित की जाए।
- एम्स रायपुर सहित प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में भी कर्मचारियों और उनके आश्रितों को योजना का लाभ मिले।
- गंभीर बीमारी या आपातकालीन स्थिति में जिला अस्पताल से रेफर कराने की अनिवार्यता समाप्त की जाए, ताकि मरीज सीधे मान्यता प्राप्त अस्पताल में इलाज करा सके।
- योजना का लाभ कर्मचारी, उसकी पत्नी, 25 वर्ष तक की संतान एवं माता-पिता को दिया जाए।
- उपचार राशि पर किसी प्रकार की अधिकतम सीमा निर्धारित न की जाए। यदि इलाज का खर्च पांच लाख रुपये से अधिक भी हो, तो भी पूरा उपचार कैशलेस और निशुल्क उपलब्ध कराया जाए।
- कर्मचारियों के वेतन से किसी भी प्रकार का प्रीमियम या अंशदान अनिवार्य रूप से नहीं काटा जाए।
जरूरत हो तो बढ़ाया जाए बजट : अनिल पांडेय
संघ के प्रांताध्यक्ष अनिल पांडेय ने कहा कि यदि कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान की आवश्यकता पड़ती है, तो राज्य सरकार को वर्तमान 100 करोड़ रुपये के बजट को बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये तक करने पर भी विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद कर्मचारियों और उनके परिजनों को अनावश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया एवं औपचारिकताओं के लिए भटकना नहीं पड़े। योजना को सरल, पारदर्शी, त्वरित और पूरी तरह कर्मचारी हितैषी बनाया जाना चाहिए।
लाखों कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने उम्मीद जताई कि विभिन्न कर्मचारी संगठनों से प्राप्त सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए राज्य सरकार ऐसी प्रभावी कैशलेस चिकित्सा योजना लागू करेगी, जिससे प्रदेश के करीब पांच लाख अधिकारी-कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर, सुलभ और आर्थिक बोझ से मुक्त स्वास्थ्य सेवाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।



