दुर्ग जिले के चरोदा में मिला दुर्लभ श्वेतवर्णी करैत, दक्षिण एशिया के चुनिंदा रिकॉर्ड में शामिल हुई छत्तीसगढ़ की अनोखी खोज


भिलाई-3। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में वन विभाग की टीम ने एक ऐसे दुर्लभ करैत सर्प का सफल रेस्क्यू किया है, जिसकी मौजूदगी दक्षिण एशिया में भी बेहद कम दर्ज की गई है। चरोदा क्षेत्र के पंचशील नगर स्थित एक मकान में सफेद रंग का सांप दिखाई देने की सूचना मिलने पर वन विभाग और प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यूअर ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षित तरीके से उसे पकड़ा। बाद में विशेषज्ञों की जांच में यह सर्प ल्यूसिस्टिक (श्वेतवर्णी) करैत निकला, जिसे वन्यजीव जगत में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।
विशेषज्ञों की जांच में हुई दुर्लभ प्रजाति की पुष्टि
रेस्क्यू के बाद सर्प का विस्तृत परीक्षण किया गया। वन्यजीव विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि यह सामान्य करैत नहीं, बल्कि आनुवंशिक परिवर्तन के कारण श्वेत रंग वाला ल्यूसिस्टिक करैत है। विशेषज्ञों के अनुसार इस स्थिति में शरीर में मेलानिन (रंगद्रव्य) की कमी होने से सांप का प्राकृतिक काला-पीला रंग विकसित नहीं हो पाता और उसका शरीर सफेद अथवा हल्के रंग का दिखाई देता है। यह अवस्था अल्बिनिज्म से अलग होती है और इसे ल्यूसिज्म कहा जाता है।
दक्षिण एशिया में बेहद कम दर्ज हुए हैं ऐसे मामले
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक प्राकृतिक वातावरण में इस तरह के श्वेतवर्णी करैत का मिलना अत्यंत असामान्य घटना है। अब तक भारत में ऐसे मामलों के सीमित रिकॉर्ड ही उपलब्ध हैं। महाराष्ट्र और ओडिशा के कुछ क्षेत्रों के अलावा नेपाल से भी इस प्रकार के करैत के मिलने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में दुर्ग जिले में इस दुर्लभ सर्प का मिलना छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा गया दुर्लभ सर्प
विशेषज्ञों की पुष्टि के बाद दुर्ग वनमण्डलाधिकारी दिपेश कपिल के निर्देश पर 23 जुलाई 2026 को इस दुर्लभ करैत को उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया। यह प्रक्रिया राजनांदगांव वनमण्डल के आरक्षित वन क्षेत्र आरएफ-549 मनगटा में पूरी सावधानी के साथ संपन्न हुई। इस दौरान दुर्ग रेंज के आर.ए. प्रमोद यादव, सर्प मित्र विजय शर्मा तथा सर्प विशेषज्ञ अविनाश मौर्या मौजूद रहे।
जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण संकेत
वन्यजीव जानकारों का मानना है कि इस तरह की दुर्लभ प्रजातियों का प्राकृतिक रूप से मिलना यह दर्शाता है कि क्षेत्र का पारिस्थितिक तंत्र अब भी अनेक अनोखे जीवों के लिए उपयुक्त बना हुआ है। यह घटना छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक विरासत और वन संरक्षण प्रयासों की महत्ता को भी रेखांकित करती है।
वन विभाग की नागरिकों से अपील
वन विभाग ने आम लोगों से आग्रह किया है कि यदि किसी भी क्षेत्र में सांप या अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो उन्हें मारने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें। ऐसी स्थिति में तत्काल वन विभाग या प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यूअर को सूचना दें, ताकि वन्यजीवों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके।




