नल-नाली तक नहीं बनवा पाए जनप्रतिनिधि, नाराज BJP पार्षदों ने मुख्यमंत्री से मांगी पदमुक्ति

 नल-नाली तक नहीं बनवा पाए जनप्रतिनिधि, नाराज BJP पार्षदों ने मुख्यमंत्री से मांगी पदमुक्ति

समोदा में BJP के 5 पार्षदों का बगावती तेवर: विकास कार्य ठप होने से सामूहिक इस्तीफे की पेशकश, मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

नल-नाली और बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर फूटा जनप्रतिनिधियों का गुस्सा, प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

समोदा/रायपुर। रायपुर जिले की नगर पंचायत समोदा में भारतीय जनता पार्टी के निर्वाचित पार्षदों की नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई है। नगर पंचायत में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और प्रशासनिक उदासीनता से क्षुब्ध भाजपा के पांच निर्वाचित पार्षदों ने सामूहिक रूप से अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भेजा है। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है और नगर पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त पत्र के अनुसार भाजपा के पांच पार्षदों ने आरोप लगाया है कि नगर पंचायत क्षेत्र में विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। वार्डों में नल, नाली, जल निकासी और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य लंबे समय से लंबित पड़े हुए हैं, जिससे आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पार्षदों ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यशैली के कारण विकास कार्यों में निरंतर शून्यता बनी हुई है। जनप्रतिनिधि होने के बावजूद वे अपने क्षेत्र की जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं, जिससे उन्हें जनता के बीच जवाब देना मुश्किल हो रहा है।

उपाध्यक्ष समेत पांच पार्षदों ने जताई नाराजगी

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र पर नगर पंचायत समोदा के उपाध्यक्ष एवं वार्ड क्रमांक-06 के पार्षद अंगेश्वर देवांगन सहित वार्ड क्रमांक-08 के पार्षद विक्रांत सोनकर, वार्ड क्रमांक-09 के पार्षद अमर निषाद, वार्ड क्रमांक-10 के पार्षद चेतन साहू तथा वार्ड क्रमांक-11 के पार्षद डोमन साहू के हस्ताक्षर हैं।पत्र में इन जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि जब विकास कार्य नहीं हो रहे हैं और जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है, तब पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसलिए उनका इस्तीफा स्वीकार कर उन्हें पदमुक्त किया जाए।

नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल

भाजपा शासित प्रदेश में भाजपा के ही निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा मुख्यमंत्री को सामूहिक इस्तीफे का पत्र भेजना राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मामला केवल स्थानीय असंतोष तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर पंचायत प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी को भी उजागर करता है।यदि पार्षदों की नाराजगी दूर नहीं हुई और मामला आगे बढ़ा, तो इसका असर नगर पंचायत के कामकाज के साथ-साथ स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज

पांच भाजपा पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे की पेशकश के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन पर निशाना साध सकता है। वहीं अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।