जमानत खारिज, जेल पहुंचे आरोपी; भूपेश बघेल के खिलाफ कथित फर्जी पोस्ट पर कांग्रेस का हल्लाबोल, भिलाई-3 थाने का घेराव
सोशल मीडिया के जरिए छवि धूमिल करने की साजिश का आरोप, सागर साहू और पुष्पराज सिंह राजपूत के खिलाफ दर्ज मामले में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
भिलाई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित फर्जी, भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक और कानूनी रूप ले लिया है। एक ओर जहां मामले में नामजद आरोपियों की जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बुधवार को भिलाई-3 थाना परिसर में जोरदार प्रदर्शन कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर सुनियोजित तरीके से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया। इसी के विरोध में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता थाना परिसर पहुंचे तथा पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रदर्शन में महापौर निर्मल कोसरे, सभापति कृष्णा चंद्राकर, सुजीत बघेल एवं ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकांत वर्मा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस जन मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध स्वीकार्य है, लेकिन झूठी, फर्जी और भ्रामक सामग्री के माध्यम से किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर हमला करना गंभीर अपराध है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि रिपोर्टर सागर साहू द्वारा “आज भिलाई (AB News)” नामक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कथित सामग्री प्रसारित की गई थी तथा प्लेटफॉर्म के संचालन में पुष्पराज सिंह राजपूत की भूमिका होने की बात सामने आई है। कांग्रेस ने दोनों सहित मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की गहन जांच की मांग की है।
जमानत याचिका खारिज, न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए
मामले में दर्ज अपराध के बाद आरोपियों की ओर से प्रस्तुत जमानत याचिका न्यायालय द्वारा खारिज कर दिए जाने की जानकारी मिली है। इसके पश्चात सागर साहू एवं पुष्पराज सिंह राजपूत को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले ने और अधिक राजनीतिक एवं सामाजिक चर्चा का रूप ले लिया है।
कांग्रेस ने उठाए कई सवाल
कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि बिना तथ्यात्मक सत्यापन के कथित सामग्री प्रसारित करने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? क्या इसके पीछे किसी व्यक्ति, समूह या राजनीतिक हित का प्रभाव था? क्या यह एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता की छवि धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास था? इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
पुलिस ने कार्रवाई का दिया भरोसा
पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन प्राप्त कर बताया कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य, चैट रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों का परीक्षण कर आगे आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।

