कुम्हारी में कथित बार पर बवाल, अब सियासी चुप्पी या मुखर विरोध? अब कांग्रेस और भाजपा—दोनों की परीक्षा

कुम्हारी/ थाना कुम्हारी क्षेत्र अंतर्गत होटल इन्द्रप्रस्थ में कथित अवैध गतिविधियों को लेकर उठा विवाद अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक चरित्र, नैतिक साहस और महिला सम्मान की कसौटी बन गया है।

छत्तीसगढ़ बजरंग दल के जिला संयोजक पुष्पराज सिंह द्वारा थाना प्रभारी को दी गई लिखित शिकायत में होटल के ऊपरी तल पर अवैध बार संचालन और बाहर से महिलाओं को बुलाकर अश्लील गतिविधियां कराए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

सामाजिक माहौल बिगाड़ने का आरोप

शिकायत के अनुसार, लंबे समय से नियम-कानून को ताक पर रखकर होटल में गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिससे क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक माहौल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसके बावजूद अब तक प्रशासनिक कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े करता है।

राजनीतिक दोहरेपन पर तीखा सवाल

उल्लेखनीय है कि भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में भाजपा नेताओं ने शराब दुकानों, बार और महिलाओं पर अत्याचार को लेकर जोरदार विरोध किया था। उस समय कुम्हारी नगर पालिका क्षेत्र में न तो कोई शराब दुकान थी और न ही बार।

आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। प्रदेश और कुम्हारी नगर पालिका क्षेत्र में भाजपा की सरकार है, शराब दुकानें और बार खुल चुके हैं। इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि कुम्हारी क्षेत्र से ही भाजपा महिला मोर्चा की दुर्ग जिला अध्यक्ष आती हैं, फिर भी थाना क्षेत्र में महिलाओं को नचाए जाने के आरोप सामने आना कई असहज सवाल खड़े करता है।

अब कांग्रेस और भाजपा—दोनों की परीक्षा

क्या कांग्रेस कार्यकर्ता इस मुद्दे को लेकर मुखर होंगे?

क्या विपक्ष में बैठी कांग्रेस महिलाओं के सम्मान और सामाजिक मर्यादा के सवाल पर सड़कों पर उतरेगी, या यह मामला भी राजनीतिक सुविधा के अनुसार भुला दिया जाएगा?

क्या भाजपा जनप्रतिनिधि विरोध में आवाज उठाएंगे?

सत्ता में रहते हुए क्या भाजपा के जनप्रतिनिधि अपने ही शासनकाल में हो रही कथित अनैतिक गतिविधियों के खिलाफ खड़े होंगे, या फिर पार्टी और सत्ता का दबाव उन्हें चुप रहने पर मजबूर करेगा?

महिला उत्थान या जनता को गुमराह करने की राजनीति?

मंचों से महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा की बातें की जाती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आती है। सवाल यह है कि महिला सम्मान क्या सिर्फ भाषणों तक सीमित है? या फिर नगर विकास और महिला उत्थान के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है?

नगर विकास या नैतिक पतन?

कभी शांत और संस्कारवान माने जाने वाले कुम्हारी में इस तरह के आरोप सामने आना नगर विकास की दिशा पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या यही विकास मॉडल है—जहां नियमों की अनदेखी, महिलाओं के शोषण के आरोप और प्रशासनिक चुप्पी एक साथ चलें?

अब बयान नहीं, कार्रवाई चाहिए

अब यह मामला सिर्फ एक होटल तक सीमित नहीं रहा। यह मुद्दा बन चुका है—

• पुलिस की निष्पक्षता का

• राजनीतिक दलों की कथनी-करनी का

• और महिला सम्मान की वास्तविक प्रतिबद्धता का

कुम्हारी की जनता अब बयान नहीं, ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई चाहती है।