PHC में मिली दवा पर गंभीर सवाल: कैल्शियम सिरप की बोतल से निकला मांस जैसा संदिग्ध पदार्थ, गर्भवती महिला दहशत में

रायपुर | स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठा बड़ा प्रश्न

राजधानी रायपुर के देवपुरी स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां से गर्भवती महिला को दिए गए कैल्शियम सिरप की बोतल में मांस जैसा संदिग्ध टुकड़ा मिलने से न सिर्फ परिवार दहशत में है, बल्कि सरकारी दवाओं की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

आठ माह की गर्भवती महिला को दिया गया था सिरप

कमल विहार सेक्टर-5 निवासी देविका साहू आठ महीने की गर्भवती हैं और वे शुरुआत से ही देवपुरी PHC में उपचार करा रही हैं। 14 नवंबर को स्वास्थ्य केंद्र द्वारा उन्हें दो बोतल कैल्शियम सिरप उपलब्ध कराया गया था। इससे पहले उन्हें टैबलेट दी जा रही थीं।

बोतल खोलते ही दिखा मांस जैसा पदार्थ

शनिवार 6 दिसंबर को देविका के पति कृष्णा साहू ने जब सिरप की बोतल खोली, तो उसमें एक मांस जैसा संदिग्ध टुकड़ा दिखाई दिया। इस दृश्य को देखकर वे घबरा गए और तुरंत बोतल लेकर सीधे स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तथा वहां मौजूद कर्मचारियों को पूरी जानकारी दी।

कर्मचारी ने भी मानी संदिग्ध वस्तु की मौजूदगी

कृष्णा साहू द्वारा दी गई शिकायत में उल्लेख किया गया है कि जब स्वास्थ्य केंद्र में बोतल की जांच की गई, तो कर्मचारियों ने भी उसमें संदिग्ध वस्तु होने की पुष्टि की। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की लिखित शिकायत खंड चिकित्सा अधिकारी को सौंपी।

फॉरेंसिक जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

शिकायत में कृष्णा साहू ने सिरप की फॉरेंसिक जांच कराने, दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करने और दवा आपूर्ति प्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सिरप की बोतल की फोटो और छायाप्रति भी शिकायत के साथ संलग्न की है।

किसी अन्य मरीज तक पहुंची होती दवा, तो बड़ा खतरा

परिवार का कहना है कि यदि यही सिरप किसी अन्य मरीज को दिया गया होता, तो उससे गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता था। खास तौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए ऐसी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

कलेक्टर से लेकर राज्यपाल कार्यालय तक शिकायत

इस गंभीर मामले की प्रतिलिपि कलेक्टर रायपुर, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, राज्यपाल कार्यालय और पुलिस मुख्यालय को भी भेजी गई है, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो सके।

स्थानीय लोगों में आक्रोश, नियमित गुणवत्ता जांच की उठी मांग

घटना के बाद क्षेत्र में लोगों में भारी आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में वितरित होने वाली दवाओं की गुणवत्ता की नियमित जांच अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई न जाएं।