छत्तीसगढ़ में ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ का जाल: 32 करोड़ की ऑनलाइन ठगी की जांच अब CBI के हवाले
छत्तीसगढ़ में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की जा रही हाई-टेक ठगी ने पिछले तीन वर्षों में भयावह रूप ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में दर्ज ऐसे 40 से अधिक बड़े मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है। इन मामलों में अब तक 32 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी की पुष्टि हो चुकी है, वहीं कई शिकायतें अभी जांचाधीन हैं।
राज्य के रायपुर, भिलाई, बिलासपुर और राजनांदगांव जैसे प्रमुख शहर इन साइबर गैंगों के लिए सबसे आसान टारगेट रहे। अपराधी खुद को सीबीआई, ईडी या पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ितों को फर्जी मामलों में फंसाने का डर दिखाते थे और उन्हें घंटों से लेकर महीनों तक ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ में रखा जाता था।
ठगी का तरीका: वीडियो कॉल पर हफ्तों तक बनाया बंधक
साइबर ठग वीडियो कॉलिंग ऐप के जरिए पीड़ितों से संपर्क करते थे।
उन पर मनी लांड्रिंग, ड्रग तस्करी या बैंक फ्रॉड जैसे गंभीर आरोप मढ़कर उन्हें भयभीत किया जाता था।
“निर्दोष साबित करने” के नाम पर वे उनकी जमा पूंजी को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराते थे।
साइबर सेल और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 35 से अधिक आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें गुजरात, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ के आरोपी शामिल हैं।
राज्य के प्रमुख डिजिटल अरेस्ट केस
1. बुजुर्ग महिला से 79 लाख की ठगी – जज बनकर दिया धमकी
राजनांदगांव की 79 वर्षीय महिला शीला सुबाल को फर्जी वीडियो कॉल के जरिए ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी व जज बताया।
मनी लांड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी और ‘जज के खाते’ में रकम जमा कराने कहा।
डरी-सहमी महिला ने 79,69,047 रुपये ठगों के बताए गए खातों में भेज दिए।
फॉरेक्स मुनाफे का झांसा देकर 1.21 करोड़ की ठगी
इसी गैंग ने एक व्यापारी को फर्जी ट्रेडिंग लिंक भेजकर पहले छोटा लाभ दिखाया और फिर बड़े मुनाफे का लालच देकर 1,21,53,590 रुपये ऐंठ लिए।
इन मामलों में पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
2. 63 वर्षीय महिला 3 महीने तक डिजिटल अरेस्ट में – 2.83 करोड़ की ठगी
रायपुर विधानसभा थाना क्षेत्र की एक 63 वर्षीय महिला को ठगों ने ईडी अधिकारी बताकर तीन महीने तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा।
उन्हें मनी लांड्रिंग में फंसाने की धमकी देते हुए 2 करोड़ 83 लाख रुपये वसूल लिए।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गोरखपुर, लखनऊ और देवरिया (उ.प्र.) से 5 आरोपियों को पकड़ा है।
अन्य बड़े मामले जिनसे हिल गया साइबर सेल
- सेजबहार, रायपुर: सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर से 88 लाख की ठगी।
- बिलासपुर: एसईसीएल के 72 वर्षीय रिटायर्ड कर्मचारी को तीन माह तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 1.09 करोड़ रुपये लूटे।
- जांजगीर–चांपा: सेवानिवृत्त लिपिक से 32 लाख रुपये की ठगी।
कैसे बचें डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी से?
- किसी संदिग्ध कॉल पर तुरंत नेशनल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
- कॉल, चैट, स्क्रीशॉट, बैंक ट्रांजैक्शन सहित सभी सबूत सुरक्षित रखें।
- ठगी के 1–3 घंटे के भीतर शिकायत करने पर पैसे रुकवाने की संभावना बढ़ जाती है।
- हेल्पलाइन पर कॉल न लगे तो cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।
- अनजान लिंक, ऐप या संदिग्ध डाउनलोड से हमेशा बचें।
- किसी अधिकारी का नाम लेकर धमकी दी जाए तो घबराएं नहीं—कॉल को ब्लॉक करें।
- सरकारी एजेंसियां कभी भी फोन पर पैसे जमा करने को नहीं कहतीं।
पुलिस की अपील: डरें नहीं, रिपोर्ट जरूर करें
पुलिस का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट ठगी पूरी तरह फर्जी और आपराधिक गतिविधि है।
इंटरनेट कॉलिंग, नकली दस्तावेज और विदेशी कॉल सेंटर जैसी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए यह गिरोह बुजुर्गों, महिलाओं और व्यापारियों को निशाना बना रहा था।
किसी भी तरह की धमकी भरी कॉल पर भरोसा न करें और तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।



