पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह का बड़ा बयान: “कांग्रेस में आवाज़ दबाने की परंपरा, जरूरत पड़ी तो नई पार्टी बनाऊंगा”

अंबिकापुर/ कांग्रेस से निष्कासित आदिवासी नेता एवं पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह एक बार फिर राजनीतिक हलचल का केंद्र बने हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि पार्टी उन्हें “सत्य बोलने की स्वतंत्रता” नहीं देती, तो वे अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाकर जनता के हक की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने किसी भी दूसरी पार्टी में जाने की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

कांग्रेस में वापसी पर रखी ‘एकमात्र शर्त’

बृहस्पत सिंह ने कहा कि वे कांग्रेस में तभी वापसी करेंगे जब पार्टी उन्हें बोलने की आज़ादी दे।
उनका आरोप है कि पार्टी के कई बड़े नेता संगठन को नुकसान पहुंचाते रहे, लेकिन हाईकमान की नजरों में वही शुभचिंतक बने हुए हैं।
उन्होंने दावा किया कि उन्हें हमेशा “सच्चाई बोलने” की सज़ा मिली है।

राजनीतिक सफर: जोगी से लेकर बघेल कैंप तक

कभी पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के क़रीबी माने जाने वाले बृहस्पत, पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान भूपेश बघेल के विश्वस्त विधायकों में शामिल रहे।
हालाँकि टीएस सिंहदेव के खिलाफ गंभीर आरोप लगाने और संगठन पर निशाना साधने के बाद वे विवादों में आ गए थे।

निर्वाचन से पहले बढ़ा विवाद, पार्टी ने किया निष्कासित

पिछले विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी शैलजा पर भी आरोप लगाए थे।
इसके बाद पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया और टिकट भी नहीं दिया।
उनकी सीट से कांग्रेसी उम्मीदवार डॉ. अजय तिर्की चुनाव हार गए, जिसके बाद बृहस्पत पर यह आरोप लगा कि उन्होंने भाजपा उम्मीदवार के साथ “डील” कर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया।

संगठन में कथित भ्रष्टाचार पर नया आरोप

हाल के दिनों में बृहस्पत सिंह ने फिर मोर्चा खोला।
कांग्रेस जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में कथित लेन-देन का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश सह-प्रभारी द्वारा उम्मीदवारों से पैसे मांगे गए।
इसी के बाद सरगुजा संभाग भर में राजनीतिक तापमान और बढ़ गया।

कांग्रेस नेताओं का पलटवार: जगह-जगह विरोध प्रदर्शन

प्रदेशभर में कांग्रेस जिलाध्यक्षों, ब्लॉक अध्यक्षों और संगठन पदाधिकारियों ने बृहस्पत सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
अंबिकापुर सहित सरगुजा संभाग के सभी जिलों में बैठकों का आयोजन कर उनके बयानों की निंदा की गई।

एफआईआर की मांग, थानों में सौंपे ज्ञापन

कई स्थानों पर कांग्रेस नेताओं ने थानों में जाकर बृहस्पत सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपे।
पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि बृहस्पत सिंह सुर्खियों में रहने के लिए उत्तेजक बयानबाजी करते रहते हैं और इससे संगठन को नुकसान पहुंचता है।

नई पार्टी बनाने की तैयारी या दबाव की राजनीति?

बृहस्पति का कहना है कि
“सच्चाई बोलने की आज़ादी नहीं मिली तो नई पार्टी बनाऊंगा। छत्तीसगढ़ की जनता के अधिकारों की लड़ाई मेरा लक्ष्य है।”

राजनीतिक जानकार इसे दबाव की राजनीति भी बता रहे हैं, जबकि समर्थकों का दावा है कि वे जल्द ही अपनी नई राजनीतिक दिशा की घोषणा कर सकते हैं।