ओशो: मैं आपको कहूं, मौन, मौन चित्त को साफ करता है। जो जितना ज्यादा मौन में प्रविष्ट होता है उतना उसके चित्त का बर्तन साफ हो जाता है। मौन के जल से चित्त के बर्तन धोए जाते हैं। लेकिन हम मौन रहना भूल गए हैं। हम एकदम बोले जा रहे हैं, दूसरों से या अपने […]Read More
शिक्षक, समाज और क्राँति, दुनिया में भौतिक समृद्धि तो विकसित
ओशो– शिक्षक और समाज के संबंध में कुछ थोड़ी सी बातें जो मुझे दिखाई पड़ती हैं, वह मैं आपसे कहूं। शायद जिस भांति आप सोचते रहे होंगे उससे मेरी बात का कोई मेल न हो। यह भी हो सकता है कि शिक्षाशास्त्री जिस तरह की बातें कहता है उस तरह की बातों से मेरा विरोध […]Read More
ओशो– कुरान अत्यंत सीधे-सादे हृदय का वक्तव्य है। उपनिषद, धम्मपद, गीता, ताओत्तेह-किंग, इन सब में एक परिष्कार है। क्योंकि बुद्ध परम सुशिक्षित, सुसंस्कृत राजघर से आए थे। मोहम्मद बेपढ़े-लिखे थे।कृष्ण जब कुछ कहते हैं, तो उस कहने में तर्क होता है, विचार की प्रक्रिया होती है, एक गणित होता है। मोहम्मद के वक्तव्य अत्यंत सरल […]Read More
अम्लेश्वर 31 मार्च : नगर पालिका क्षेत्र अमलेश्वर में अंचल के पत्रकार साथियों ने मिलकर प्रेस क्लब अम्लेश्वर का गठन कर लिए हैं। जिसका उद्देश्य क्षेत्र की सभी जन हित समस्याओं को प्रेस के माध्यम से शासन प्रशासन का ध्यानाकर्षण करा कर त्वरित निराकरण कराया जाना है ,साथ ही शासन द्वारा चलाये जाने वाली जन […]Read More
ओशो – बुद्ध कहते हैं , पाप के फल से बचो मत ।उसके , पाप के फल को निष्पक्ष भाव से भोग लो ।यह बड़ा कीमती सूत्र है ।तुमने कुछ किया , अब उसका दुख आया ,इस दुख को तटस्थ भाव से भोग लो !अब आनाकानी मत करो ।अब बचने का उपाय मत खोजो ।क्योंकि […]Read More
ओशो दुर्गा पर “..चाहे पदार्थ का जन्म हो या चेतना का जन्म; चाहे धरती का जन्म हो या स्वर्ग का, सब कुछ अस्तित्व की गहराई में छिपे रहस्य से ही जन्म लेता है। इसलिए मैंने कहा है कि जिन्होंने ईश्वर को माँ के रूप में देखा है – दुर्गा या अम्बा के रूप में – […]Read More
मनुष्य एक अकेली प्रजाति है जिसका आहार अनिश्चित है, जाने
ओशो- मनुष्य एक अकेली प्रजाति है जिसका आहार अनिश्चित है। अन्य सभी जानवरों का आहार निश्चित है। उनकी बुनियादी शारीरिक जरूरतें और उनका स्वभाव फैसला करता है के वे क्या खाते हैं और क्या नहीं; कब वे खाते हैं और कब उन्हें नहीं खाना होता है। किन्तु मनुष्य का व्यवहार बिलकुल अप्रत्याशित है, वह बिल्कुल […]Read More
ओशो- एक बहुत बड़े डॉक्टर ने, केनेथ वाकर ने अपनी आत्म—कथा में लिखा है कि मैं अपने जीवन भर के अनुभव से यह कहता हूं कि लोग जो भोजन करते हैं, उनमें से आधे भोजन से उनका पेट भरता है और आधे भोजनों से हम डॉक्टरों का पेट भरता है। अगर वे आधा भोजन करें, […]Read More
ओशो– एक मित्र ने पूछा है कि आप नये विचारों की क्रांति की बात कहते हैं। क्या अब भी कभी हो सकता है जो पहले नहीं हुआ है? इस पृथ्वी पर सभी कुछ पुराना है, नया क्या है? इस संबंध में जो पहली बात आपसे कहना चाहता हूं, वह यह कि इस पृथ्वी पर सभी […]Read More
ओशो- अभी सिर्फ चालीस साल पहले काशी में एक साधु हुए हैं विशुद्धानन्द। सिर्फ ध्वनियों के विशेष आघात से किसी की भी मृत्यु हो सकती थी, ऐसे सैकड़ों प्रयोग विशुद्धानन्द ने करके दिखाए। वह साधु अपने बन्द मन्दिर के गुम्बज में बैठा था जो बिलकुल ‘अनहाईजीनिक’ था।पहली दफा तीन अंग्रेज डाक्टरों के सामने प्रयोग किया […]Read More