खेरधा में प्रस्तावित सीएनजी प्लांट पर बढ़ा विवाद: चारागाह बचाने के लिए ग्रामीणों का विरोध, प्रशासन के साथ बैठक में भी नहीं बनी सहमति

दुर्ग। ग्राम पंचायत खेरधा में प्रस्तावित बायो गैस (सीएनजी) प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। चारागाह की भूमि पर प्लांट निर्माण का विरोध कर चुके ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के बाद शनिवार को भिलाई-चरोदा नगर निगम कार्यालय में आयोजित प्रशासनिक बैठक में भी अपना पक्ष मजबूती से रखा। बैठक में ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि गांव की एकमात्र चारागाह भूमि किसी भी कीमत पर सीएनजी प्लांट के लिए नहीं दी जाएगी।

बैठक में भिलाई-चरोदा नगर निगम की आयुक्त, एसडीएम, संबंधित विभागों के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों के साथ समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया गया, लेकिन ग्रामीण अपने रुख पर अडिग रहे।

ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम भिलाई के ठोस कचरा प्रबंधन एवं बायो गैस (सीएनजी) प्लांट के लिए ग्राम खेरधा की लगभग 17.40 हेक्टेयर शासकीय भूमि का चयन किया गया है। उनका आरोप है कि यह भूमि वर्षों से चारागाह के रूप में उपयोग में लाई जा रही है और गांव सहित आसपास के क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए यही एकमात्र सुरक्षित चराई स्थल है। यदि यहां प्लांट स्थापित किया जाता है तो पशुपालन पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

ग्रामीणों ने बताया कि 17 जुलाई 2026 को प्रशासनिक अधिकारियों एवं पुलिस बल की मौजूदगी में प्रस्तावित स्थल की साफ-सफाई कर निर्माण की तैयारी शुरू की गई थी, जिसका ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर विरोध किया था। उनका कहना है कि राजस्व अभिलेखों में भी यह भूमि चारागाह के रूप में दर्ज है, इसके बावजूद यहां औद्योगिक परियोजना स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

ग्रामीणों का दावा है कि इस निर्णय से करीब 12 हजार से अधिक पशुओं के सामने चारे का संकट उत्पन्न हो जाएगा। पशुपालकों की आजीविका प्रभावित होगी और गांव की पारंपरिक चराई व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो सकती है।

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने पर्यावरणीय चिंताओं को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि प्रस्तावित प्लांट मुख्य मार्ग से लगा हुआ है। ऐसे में भविष्य में दुर्गंध, प्रदूषण और प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट का असर आसपास के गांवों तथा राहगीरों पर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि इससे पर्यावरण के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खेरधा की चारागाह भूमि पर प्रस्तावित सीएनजी प्लांट का निर्माण तत्काल रोका जाए तथा परियोजना के लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थान का चयन किया जाए, जिससे गांव की चारागाह सुरक्षित रहे और किसानों, पशुपालकों एवं आम नागरिकों के हित प्रभावित न हों।

फिलहाल प्रशासन और ग्रामीणों के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस परियोजना को लेकर विवाद और गहराने की संभावना बनी हुई है।