20 लाख की उगाही का खेल! स्पर्श हॉस्पिटल को बंद कराने की धमकी, फर्जी ‘निरीक्षक’ बनकर दबाव बनाता रहा आरोपी

भिलाई में अस्पताल प्रबंधन से गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला

भिलाई: स्पर्श हॉस्पिटल, रामनगर के महाप्रबंधक अखिल मडामे की शिकायत पर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति पर खुद को उच्चस्तरीय निरीक्षक बताकर 20 लाख रुपये की उगाही की कोशिश करने का आरोप लगा है।

आरोपी: गुरुमीत सिंह वाधवा (उम्र लगभग 60 वर्ष), निवासी सुंदर नगर, भिलाई

मुख्य आरोप: ब्लैकमेलिंग, धमकी, गाली-गलौज, फर्जी पहचान का उपयोग

फर्जी पहचान बनाकर रचा दबाव का खेल

शिकायत के अनुसार आरोपी गुरुमीत सिंह वाधवा नवंबर 2025 से लगातार अस्पताल पहुंचकर खुद को फोर्ब्स मैग्जीन का मैनेजिंग एडिटर और अपनी बेटी को बीबीसी पत्रकार बताता रहा। इतना ही नहीं, उसने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ फोटो दिखाकर खुद को सरकारी जांच अधिकारी होने का दावा किया। प्रबंधन के मुताबिक ये दस्तावेज संदिग्ध और फर्जी प्रतीत हुए। आरोपी ने अस्पताल की तथाकथित जांच कर कई खामियां बताईं और रिपोर्ट के नाम पर कार्रवाई की धमकी देने लगा।

“20 लाख दो, नहीं तो अस्पताल बंद”

आरोपी ने अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बनाते हुए कहा कि उसकी पहुंच बड़े नेताओं और अधिकारियों तक है और वह अस्पताल की पार्किंग बंद कराकर पूरा संस्थान बंद करवा सकता है। इसके बदले उसने 20 लाख रुपये की मांग की। रकम नहीं देने पर आरोपी ने खुलेआम गाली-गलौज करते हुए कहा कि वह झूठे केस में फंसा देगा और अस्पताल को हमेशा के लिए बंद करा देगा।

अस्पताल में घुसकर दी अश्लील गालियां

दिनांक 05 जनवरी 2026 को आरोपी अस्पताल पहुंचा और महाप्रबंधक सहित स्टाफ के सामने माँ-बहन की अश्लील गालियां दीं। उसने यह भी दावा किया कि कई लोगों को पहले भी बर्बाद कर चुका है और आईएएस अधिकारी भी उससे डरते हैं। घटना के प्रत्यक्षदर्शियों में मल्लेश राव, आलोक दीक्षित, हेमंत देवांगन और जेथन जॉर्ज शामिल हैं।

फोन कॉल के जरिए लगातार धमकी और उगाही

अगले दिन 06 जनवरी को आरोपी ने फोन कॉल कर फिर से गाली-गलौज की और 20 लाख की मांग दोहराई। अलग-अलग नंबरों से लगातार कॉल कर मानसिक दबाव और भय का माहौल बनाया गया।

आरटीआई और शिकायतों का हथियार बनाकर दबाव

आरोपी ने विभिन्न शासकीय कार्यालयों में झूठी शिकायतें और आरटीआई आवेदन देकर अस्पताल पर कार्रवाई कराने की कोशिश की। इसके आधार पर अधिकारियों की जांच भी करवाई गई, जिससे प्रबंधन पर दबाव बना।

इतना ही नहीं, आरोपी ने कुछ यूट्यूब चैनलों को इंटरव्यू देकर अस्पताल की छवि खराब करने की भी कोशिश की।

कानूनी कार्रवाई शुरू

पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(4) एवं छत्तीसगढ़ चिकित्सा सेवा संस्थान अधिनियम 2010 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

डर के कारण देर से हुई शिकायत

महाप्रबंधक ने बताया कि आरोपी की राजनीतिक पहुंच के दावे और धमकियों के कारण वे पहले शिकायत करने से डर रहे थे। लेकिन जब मामला लगातार बढ़ता गया, तब उन्होंने साहस जुटाकर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई।

स्पष्ट संदेश: कानून से ऊपर कोई नहीं

यह मामला दिखाता है कि फर्जी पहचान, आरटीआई का दुरुपयोग और दबाव बनाकर उगाही जैसे अपराध किस तरह संस्थानों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई अब इस पूरे नेटवर्क और आरोपी के दावों की सच्चाई सामने लाएगी।