शिक्षकों से ठगी का बड़ा खेल : डिजिटल सिग्नेचर के नाम पर 50 लाख की अवैध वसूली!
दल्लीराजहरा/ बालोद जिले से शिक्षा विभाग में घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि डिजिटल सिग्नेचर की अनिवार्यता के नाम पर लगभग 50 लाख रुपये की वसूली की गई है। आरोप है कि यह रकम विकासखंड स्रोत समन्वयकों (BRCs) और रायपुर की एक निजी कंपनी की मिलीभगत से शिक्षकों से जबरन वसूली गई।
कंपनी की प्रमुख रचना तिवारी को इस पूरे मामले में मुख्य भूमिका में बताया जा रहा है। इस खुलासे के बाद शिक्षक वर्ग में गहरा आक्रोश है और विभागीय जांच की मांग तेज हो गई है।
RTI में हुआ खुलासा, विभाग की अनुमति नहीं थी
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ, दुर्ग संभाग के अध्यक्ष भुवन सिन्हा ने आरटीआई के माध्यम से जब जानकारी मांगी, तब यह बड़ा मामला उजागर हुआ।
जांच में सामने आया कि न तो शिक्षा विभाग और न ही किसी सरकारी एजेंसी ने डिजिटल सिग्नेचर बनाने की अनुमति दी थी। इसके बावजूद शिक्षकों को यह कहकर मजबूर किया गया कि यह प्रक्रिया विभागीय कार्यों के लिए अनिवार्य है।
बीआरसी कार्यालयों में लगे “शिविर”, शिक्षकों से वसूले 3000-3000 रुपये
सूत्रों के अनुसार, जिले के लगभग 1580 स्कूलों से प्रति स्कूल 3000 रुपये की वसूली की गई।
कई स्थानों पर बीआरसी कार्यालयों में विशेष शिविर आयोजित किए गए, जहां शिक्षकों को डिजिटल सिग्नेचर बनवाने के लिए बाध्य किया गया।
शिक्षकों को जो रसीद दी गई, उसमें न स्कूल का नाम था, न तारीख और न ही किसी का हस्ताक्षर, जिससे स्पष्ट है कि पूरा दस्तावेज़ फर्जी था।
चार सालों में एक बार भी इस्तेमाल नहीं हुए डिजिटल सिग्नेचर
शिक्षकों से जो पेन ड्राइव के रूप में डिजिटल सिग्नेचर डिवाइस दिए गए थे, वे पिछले चार वर्षों में एक बार भी उपयोग में नहीं लाए गए।
यानी, शिक्षकों से लाखों रुपये वसूलकर उन्हें बेकार डिवाइस थमा दिए गए।
शिक्षक संघ की मांग : दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने इस पूरे मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका जताई है।
संघ के अध्यक्ष भुवन सिन्हा ने मानव संसाधन मंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर मामले की उच्च स्तरीय जांच और वसूली गई राशि वापस करने की मांग की है।
शिक्षकों का कहना है कि जब तक इस घोटाले के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले
गौरतलब है कि इसी तरह के मामले वर्ष 2022 में रायपुर जिले के आरंग और धरसींवा ब्लॉक में भी सामने आ चुके हैं, लेकिन तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब सवाल यह उठता है कि क्या शिक्षा विभाग इस बार भी चुप्पी साधे रहेगा या दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगा।



