सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुम्हारी में दवाइयों की किल्लत, मरीज परेशान
कुम्हारी/ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुम्हारी की हालत इन दिनों बेहद खराब है। यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि अस्पताल में आवश्यक दवाइयों का स्टॉक ही उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि डॉक्टर और स्टाफ मरीजों को उपचार के बाद मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की सलाह दे रहे हैं। सरकारी अस्पताल में मुफ्त और आवश्यक दवाइयां न मिलना स्थानीय नागरिकों के लिए चिंता और परेशानी का बड़ा कारण बन गया है।
कुत्ते के काटने पर नहीं मिल रहा टीका
अस्पताल की सबसे बड़ी कमी यह है कि यहां कुत्ते के काटने पर लगाए जाने वाला टीका (एंटी-रेबीज इंजेक्शन) तक उपलब्ध नहीं है। यह टीका जीवन रक्षक माना जाता है और कुत्ते के काटने के मामलों में तुरंत लगाना जरूरी होता है। लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि ऐसे संवेदनशील इंजेक्शन भी स्टॉक में नहीं हैं। इससे पीड़ित मरीज और उनके परिजन दहशत में रहते हैं। अक्सर उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि यह टीका कहीं और से लगवा लें।
मरीजों की बढ़ रही मुश्किलें
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी सुविधाएं और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध ही नहीं हैं तो फिर इस अस्पताल का फायदा क्या है। मरीज इलाज के भरोसे यहां आते हैं, लेकिन निराश होकर वापस लौट जाते हैं। कई बार आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण लोग बाहर से दवाइयां खरीदने में भी सक्षम नहीं होते। इस वजह से उनका इलाज अधूरा रह जाता है, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है।
जिम्मेदारों की चुप्पी
इन सारी समस्याओं को लेकर क्षेत्रीय नागरिकों ने कई बार शिकायतें की हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और नगर के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि भी इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। दवाइयों का नियमित स्टॉक अस्पताल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी विभाग की है, लेकिन लगातार लापरवाही से लोगों का भरोसा टूटता जा रहा है।
लोगों की मांग
कुम्हारी के नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति सुधारी जाए। सभी आवश्यक दवाइयां और जीवन रक्षक इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाएं ताकि मरीजों को राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो उन्हें मजबूरन आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा।
कुम्हारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत को उजागर करती है। जहां लोगों को मुफ्त दवाइयां और इलाज की सुविधा मिलनी चाहिए, वहां मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कुत्ते के काटने जैसे आपात मामलों में भी अस्पताल हाथ खड़े कर देता है। यदि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते ध्यान नहीं देंगे तो यह लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकती है।



