गनियारी में कल उमड़ेगा जनसैलाब, पद्म विभूषण तीजन बाई को दी जाएगी भावभीनी श्रद्धांजलि

दशगात्र कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी, हाई स्कूल मैदान में होगा श्रद्धांजलि समारोह; वीआईपी आगमन को लेकर अस्थायी हेलीपैड भी तैयार

भिलाई/दुर्ग। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर स्थापित करने वाली पंडवानी की अप्रतिम साधिका और पद्म विभूषण सम्मान से अलंकृत तीजन बाई की स्मृति में मंगलवार 14 जुलाई को उनके पैतृक गांव गनियारी में श्रद्धांजलि एवं दशगात्र कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेशभर से लोक कलाकारों, साहित्यकारों, संस्कृति प्रेमियों, जनप्रतिनिधियों और हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामवासियों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।

हाई स्कूल मैदान में होगा मुख्य श्रद्धांजलि समारोह

गनियारी के हाई स्कूल मैदान में आयोजित होने वाले इस विशाल कार्यक्रम के लिए भव्य पंडाल तैयार किया गया है। बड़ी संख्या में आने वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए बैठने की व्यवस्था, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, पार्किंग, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन के विभिन्न विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि आयोजन सुचारु और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

प्रदेश की नामचीन हस्तियां होंगी शामिल

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि, कला एवं साहित्य जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों के शामिल होने की संभावना है। वीआईपी आगमन को देखते हुए प्रशासन द्वारा अस्थायी हेलीपैड का निर्माण भी कराया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ प्रोटोकॉल संबंधी सभी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।

लोककला की अमर विरासत को नमन करेगा छत्तीसगढ़

नगर निगम भिलाई-चरोदा के महापौर निर्मल कोसरे ने कहा कि तीजन बाई केवल एक लोक कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान की सशक्त प्रतीक थीं। उन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा, संघर्ष और समर्पण के बल पर पंडवानी जैसी लोककला को गांव की चौपालों से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया।

महापौर कोसरे ने कहा कि तीजन बाई का जीवन इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा और मेहनत के दम पर कोई भी व्यक्ति अपनी मिट्टी की खुशबू को पूरी दुनिया तक पहुंचा सकता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, बोली-बानी और सांस्कृतिक मूल्यों को वैश्विक पहचान दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनका निधन केवल कला जगत की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की अपूरणीय क्षति है।

उन्होंने कहा कि गनियारी में आयोजित होने वाला श्रद्धांजलि एवं दशगात्र कार्यक्रम प्रदेशवासियों की ओर से अपनी महान लोक कलाकार के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और भावनात्मक जुड़ाव की अभिव्यक्ति है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को उनकी कला साधना, संघर्ष और सांस्कृतिक योगदान से प्रेरणा लेने का अवसर भी प्रदान करेगा।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति को मिलेगा सम्मान

महापौर ने कहा कि तीजन बाई ने जीवनभर लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य किया। उनकी आवाज में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की महक और लोकजीवन की आत्मा बसती थी। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कला, उनकी विरासत और उनके द्वारा स्थापित सांस्कृतिक मूल्य सदैव जीवित रहेंगे।

प्रशासन ने की सहयोग की अपील

जिला प्रशासन ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोगों से अनुशासन बनाए रखने और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सहयोग करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि हजारों लोगों की संभावित उपस्थिति को देखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं ताकि कार्यक्रम गरिमापूर्ण, शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।गनियारी में आयोजित होने वाला यह श्रद्धांजलि समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली महान विभूति तीजन बाई के प्रति पूरे प्रदेश की सामूहिक श्रद्धांजलि और सम्मान का प्रतीक बनेगा।