विकास के नाम पर लाखों खर्च, नतीजा ऐसा कि झाड़ू लगाते ही उखड़ने लगी सड़क! कुम्हारी में ‘गुणवत्ता’ की खुली पोल
वार्ड 1, 10 और 14 में सीसी रोड निर्माण पर उठे गंभीर सवाल, एक महीने में ही उखड़ने लगी गिट्टियां; जनता के पैसों का हिसाब कौन देगा?
लोक निर्माण प्रभारी पार्षद डिकेश पटेल ने जताई नाराजगी, ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग; भुगतान रोकने और जांच कराने की उठी आवाज
कुम्हारी। नगर के विकास के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर विकास की तस्वीर कुछ ऐसी नजर आ रही है कि नई सड़क पर झाड़ू लगाते ही उसकी गिट्टियां उखड़ने लगी हैं। सवाल यह है कि आखिर यह विकास किसके लिए हो रहा है और जनता के खून-पसीने की कमाई से बन रही सड़कों की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है? कुम्हारी नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 1, 10 और 14 में हाल ही में निर्मित सीसी रोड की हालत ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निर्माण के महज एक महीने के भीतर सड़कों की गिट्टियां उखड़ने, रेत बाहर आने और धूल उड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। यदि सड़कें बनने के कुछ ही दिनों में जवाब देने लगें, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा था?
लाखों की सड़कें, लेकिन मजबूती का पता पहले महीने में ही चल गया!
कुम्हारी नगर पालिका क्षेत्र में लाखों रुपये की लागत से सीसी रोड का निर्माण कराया जा रहा है। संबंधित सड़कों की लागत इस प्रकार बताई गई है—
- वार्ड क्रमांक 1: अशोक पटेल के घर से काशीराम सोनकर के घर तक — 9.50 लाख रुपये।
- वार्ड क्रमांक 10: गुजराती भवन से स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल तक — 29.08 लाख रुपये।
- वार्ड क्रमांक 14: पीएमश्री स्कूल से सोनकर भवन तक — 23.86 लाख रुपये।
इन तीनों सड़कों की कुल लागत 62.44 लाख रुपये बताई गई है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी यदि सड़कों से गिट्टियां उखड़ने लगें और धूल उड़ने लगे, तो निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विकास का दावा अपनी जगह है, लेकिन सड़क की असलियत झाड़ू लगाते ही सामने आने लगे, तो गुणवत्ता के प्रमाणपत्रों की भी जांच जरूरी हो जाती है।
वार्ड 1 में झाड़ू चली और सड़क की गुणवत्ता खुलकर सामने आ गई!
वार्ड क्रमांक 1 के निवासियों का आरोप है कि सड़क निर्माण को अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन उसकी गिट्टियां उखड़ने लगी हैं। लोगों का कहना है कि सड़क की मोटाई कम रखी गई और सीमेंट की तुलना में रेत तथा गिट्टी का इस्तेमाल अधिक किया गया।
स्थानीय महिलाओं के मुताबिक, सड़क पर झाड़ू लगाने भर से रेत उधड़कर बाहर आने लगती है। यदि यह शिकायत सही पाई जाती है, तो यह केवल निर्माण की कमजोरी का मामला नहीं, बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल होगा।
अब सवाल यह है कि जिस सड़क को वर्षों तक जनता की सुविधा के लिए टिकाऊ होना चाहिए, उसकी मजबूती का इम्तिहान पहले महीने में ही क्यों होने लगा? वार्डवासियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और सड़क का गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।
वार्ड 10 में गिट्टियां उखड़ीं, धूल का गुबार बना परेशानी
वार्ड क्रमांक 10 में भी सड़क की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क की गिट्टियां उखड़ने से जगह-जगह गड्ढे बनने लगे हैं। वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल उड़ने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिस सड़क से लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलनी चाहिए, वही सड़क अब धूल और उखड़ती गिट्टियों के कारण परेशानी का सबब बन रही है। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करना जरूरी हो गया है।
वार्ड 14 के पार्षद ने सीएमओ को लिखा पत्र, भुगतान रोकने की मांग
वार्ड क्रमांक 14 में निर्मित सीसी रोड को लेकर पार्षद लेखराम साहू ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को पत्र लिखकर शिकायत की है। उन्होंने बताया कि हाई स्कूल और पानी टंकी के सामने बनी सड़क से धूल उड़ रही है और निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण नहीं हुआ है।
पार्षद ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कराने तथा संबंधित कार्य के भुगतान को रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि यह मार्ग बस्ती को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है। निर्माण को अभी लगभग एक महीना ही हुआ है, लेकिन सड़क की हालत देखकर उसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखना होगा कि शिकायत के बाद संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर तकनीकी जांच कराते हैं या मामला कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाता है।
डिकेश पटेल का सवाल—जनता के पैसों से खिलवाड़ आखिर कब तक?
नगर पालिका परिषद कुम्हारी के लोक निर्माण प्रभारी पार्षद डिकेश पटेल ने वार्ड क्रमांक 1, 10 और 14 में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि सड़कों से गिट्टियां उखड़ने और धूल उड़ने की शिकायतों से नगर पालिका अध्यक्ष, संबंधित अधिकारियों तथा इंजीनियर को पहले ही अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद एक महीने बीतने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
डिकेश पटेल ने कहा कि गुणवत्ताहीन निर्माण करने वाले ठेकेदारों और यदि जांच में लापरवाही प्रमाणित होती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि समस्या का तत्काल निराकरण नहीं होने पर मामले की शिकायत जिला कलेक्टर और संबंधित मंत्री से की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि नगर का विकास केवल कागजों, फाइलों और दावों में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। जनता के पैसों से होने वाले प्रत्येक निर्माण कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है।
बड़ा सवाल: सड़क बनाने की जिम्मेदारी पूरी या गुणवत्ता की भी?
कुम्हारी की इन सड़कों को लेकर अब कई सवाल सामने हैं। क्या निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार हुआ? क्या संबंधित इंजीनियरों ने निर्माण के दौरान नियमित निरीक्षण किया? क्या सड़क की मोटाई, सामग्री और मजबूती की जांच की गई? और यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो क्या संबंधित ठेकेदारों से जवाब मांगा जाएगा?
फिलहाल ये सवाल जांच और आधिकारिक जवाब की प्रतीक्षा में हैं। शिकायतों के आधार पर आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता, लेकिन निर्माण के इतने कम समय में सामने आई समस्याओं की निष्पक्ष तकनीकी जांच जरूरी है।
आखिर विकास का मतलब केवल सड़क बनाकर तस्वीर खिंचवाना नहीं, बल्कि ऐसी सड़क बनाना है जो जनता के काम आए। यदि लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी सड़क की गिट्टियां एक महीने में उखड़ने लगें, तो जवाबदेही तय होनी ही चाहिए। अब देखना यह है कि कुम्हारी नगर पालिका इन शिकायतों पर कार्रवाई करती है या जनता को अपनी नई सड़कों की मजबूती का इम्तिहान झाड़ू से ही लेते रहना पड़ेगा।
जल्द होगा खुलासा, इस विकास कार्य की स्थिति ऐसे कैसे हुई? संबंधित विभाग के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि से चर्चा,,,, क्रमशः…..



