डी-केबिन और सी-केबिन में यात्री ट्रेनों का ठहराव फिर शुरू करने की मांगसैकड़ों ग्रामीणों के साथ रायपुर DRM कार्यालय पहुंचे कांग्रेस नेता राम सूर्यवंशी
दुर्ग/रायपुर। देवबलौदा, उरला एवं चरोदा क्षेत्र के ग्रामीणों को यात्री ट्रेनों के ठहराव बंद होने से हो रही परेशानियों को लेकर सोमवार को दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस के जिला महामंत्री एवं प्रदेश महासचिव, असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस श्री राम सूर्यवंशी के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण रायपुर स्थित DRM कार्यालय पहुंचे।
इस दौरान राम सूर्यवंशी ने एन. शेखर राव, एन. रामू, देवेंद्र, दिनेश यादव, संतोष साहू एवं रितु वर्मा सहित क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ ADRM से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया।
यात्री ट्रेनों का अस्थायी ठहराव बंद होने से बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि डी-केबिन एवं सी-केबिन में पूर्व में यात्री ट्रेनों का ठहराव होता था, लेकिन कुछ समय से इन ट्रेनों का ठहराव अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके कारण देवबलौदा, उरला, चरोदा सहित आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले सैकड़ों लोगों को रोजमर्रा के काम, रोजगार एवं अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आने-जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन यात्री ट्रेनों के माध्यम से आवागमन करते हैं। ट्रेनों का ठहराव बंद होने से उन्हें दूसरे स्टेशनों तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय और खर्च करना पड़ रहा है।
जल्द ठहराव बहाल करने की मांग
राम सूर्यवंशी ने ADRM के समक्ष ग्रामीणों की समस्याओं को रखते हुए मांग की कि क्षेत्र की जनता की सुविधा एवं रोजमर्रा के आवागमन को देखते हुए डी-केबिन और सी-केबिन में यात्री ट्रेनों का ठहराव जल्द से जल्द पुनः शुरू किया जाए।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के लोगों की समस्या लंबे समय तक बनी रही तो इसका सीधा असर मजदूरों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और रोजाना आवागमन करने वाले आम नागरिकों पर पड़ेगा।
मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यात्री ट्रेनों का ठहराव जल्द बहाल नहीं किया गया तो क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों को साथ लेकर आंदोलन किया जाएगा और DRM कार्यालय का घेराव भी किया जा सकता है।
इस संबंध में ग्रामीणों की ओर से रेलवे प्रशासन को लिखित आवेदन सौंपकर यात्री ट्रेनों का ठहराव शीघ्र बहाल करने की मांग की गई। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि रेलवे प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेगा।



