जोरा तालाब का रास्ता घेरने पर भड़का ग्रामीणों का गुस्सा, बाउंड्रीवॉल के खिलाफ सड़क पर उतरे किसान

 जोरा तालाब का रास्ता घेरने पर भड़का ग्रामीणों का गुस्सा, बाउंड्रीवॉल के खिलाफ सड़क पर उतरे किसान

दशकों पुराने आम रास्ते को निजी जमीन बताकर बंद करने का आरोप, नक्शे में हेरफेर की निष्पक्ष जांच की मांग; प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी

राकेश कुमार की रिपोर्ट | कुम्हारी

कुम्हारी। नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 9 स्थित जोरा तालाब जाने वाले वर्षों पुराने आम रास्ते पर बाउंड्रीवॉल निर्माण को लेकर रविवार को ग्रामीणों और किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया। बाजार चौक स्थित गांधी चौरा में आयोजित आपात ग्राम बैठक में रास्ता बंद किए जाने के मुद्दे पर ग्रामीणों, किसानों और जनप्रतिनिधियों ने जमकर विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिस रास्ते से वर्षों से तालाब में निस्तारी और खेतों तक आवागमन होता रहा है, उसे निजी जमीन बताकर बंद करने की कोशिश की जा रही है।ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता बंद होने से तालाब तक पहुंच के साथ-साथ किसानों की खेती-किसानी भी प्रभावित होगी। ट्रैक्टर, कृषि उपकरण और अन्य साधनों को खेतों तक ले जाना मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि भू-नक्शे में कथित हेरफेर कर शासकीय रास्ते को निजी भूमि के रूप में दर्शाने का प्रयास किया गया है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

‘रास्ता बंद हुआ तो खेतों तक कैसे पहुंचेंगे किसान?’

प्रभावित किसान चंद्रिका प्रसाद यादव ने कहा कि उनकी करीब एक एकड़ जमीन इसी क्षेत्र से लगी हुई है और वे वर्षों से इसी रास्ते से खेती-किसानी का काम करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि बचपन से ही लोगों को इसी मार्ग से जोरा तालाब में निस्तारी के लिए आते-जाते देखा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों द्वारा निजी स्वार्थ के लिए ग्रामीणों और किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि प्रशासन को मौके की वास्तविक स्थिति और राजस्व रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

ग्रामीण बोले—तालाब और खेत तक जाने के लिए क्या हेलीकॉप्टर बुलाएं?

शांति नगर वार्ड निवासी मदन सिन्हा ने कहा कि उनका परिवार बचपन से जोरा तालाब में निस्तारी के लिए इसी रास्ते से आता-जाता रहा है। उनका कहना है कि पहले कभी किसी ने इस रास्ते को बंद करने का प्रयास नहीं किया।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि रास्ता ही बंद कर दिया जाएगा तो ग्रामीण तालाब और किसान अपने खेतों तक कैसे पहुंचेंगे? उन्होंने शासन-प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

भू-स्वामी बोले—2014 में हो चुका है सीमांकन, नक्शे के अनुसार बन रही बाउंड्री

वहीं दूसरी ओर निजी भू-स्वामी राकेश पाण्डेय ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संबंधित जमीन उनकी पुरानी खरीदी हुई संपत्ति है। उनके अनुसार वर्ष 2014 में ही जमीन का सीमांकन कराया जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि जनवरी-फरवरी 2026 में भी आरआई, पटवारी और पार्षदों की मौजूदगी में सीमांकन कराया गया था।

राकेश पाण्डेय का कहना है कि पहले जमीन पर जालीदार बाउंड्री लगाई गई थी, जिसे बार-बार तोड़े जाने के बाद अब वे राजस्व नक्शे के अनुसार पक्की बाउंड्री का निर्माण करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी नगर पालिका सीएमओ नेतराम चंद्राकर को भी है। यदि किसी को आपत्ति है तो राजस्व विभाग से विधिवत जांच और सीमांकन कराया जा सकता है।

नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा—सहमति नहीं बनी तो राजस्व विभाग करेगा सीमांकन

नगर पालिका परिषद कुम्हारी की अध्यक्ष श्रीमती मीना वर्मा ने कहा कि जोरा तालाब के पास बन रही सड़क के निर्माण में कुछ किसानों की निजी जमीन आने के कारण काम प्रभावित हुआ है। उन्होंने किसानों और संबंधित पक्षों से आपसी सहमति से समाधान निकालने की अपील की।

उन्होंने कहा कि यदि सहमति नहीं बनती है तो पटवारी, आरआई, तहसीलदार, एसडीएम और आवश्यकता पड़ने पर कलेक्टर के माध्यम से विधिवत सीमांकन कराया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि तालाब में नाली का पानी जाने की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है और स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा।

उपाध्यक्ष ने दी तीन दिन में कार्रवाई की चेतावनी

नगर पालिका उपाध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत ने बैठक में कहा कि ग्रामीणों की मौजूदगी में यह तय हुआ है कि कथित अतिक्रमण के संबंध में तीन दिन के भीतर नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण सामूहिक रूप से आगे की कार्रवाई करने के लिए मजबूर होंगे।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण अगले दिन एसडीएम और कलेक्टर को आवेदन देकर जमीन की नपाई और सीमांकन की मांग करेंगे। साथ ही उन्होंने कथित तौर पर शासकीय भूमि और नक्शे में गड़बड़ी के मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की।

पूर्व पालिका अध्यक्ष बोले—पुराना रास्ता बंद करना किसानों के साथ अन्याय

पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राजेश्वर सोनकर ने कहा कि बुजुर्गों के समय से चले आ रहे रास्ते को पक्का बनाने का काम शुरू हुआ था, लेकिन कथित रूप से भू-स्वामी द्वारा विकास कार्य में बाधा उत्पन्न की जा रही है।

उन्होंने कहा कि नाली का पानी खेतों में जाने की समस्या पर जब प्रशासनिक स्तर पर तत्काल समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान कर नाली के पानी का रास्ता डायवर्ट किया। उन्होंने कहा कि किसानों और ग्रामीणों के हित की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

बैठक में भारी भीड़, पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में हुआ हंगामा

ग्राम बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष मीना वर्मा, उपाध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत, पूर्व अध्यक्ष राजेश्वर सोनकर, पार्षद लेखराम साहू, डिकेश पटेल, विकास सोनकर, भाजपा मंडल अध्यक्ष धर्मेंद्र सिन्हा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मनहरण यादव सहित पुलिस-प्रशासन के अधिकारी, किसान और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

बैठक के दौरान जोरा तालाब जाने वाले रास्ते के साथ खेतों में जा रहे नाली के गंदे पानी को लेकर भी तीखी बहस हुई। बाद में ग्रामीणों ने स्वयं नाली के पानी को डायवर्ट किया।

अब प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती—रास्ता सरकारी या निजी?

जोरा तालाब मार्ग को लेकर विवाद अब केवल रास्ते तक सीमित नहीं रह गया है। मामला राजस्व रिकॉर्ड, सीमांकन, कथित नक्शा हेरफेर और बाउंड्रीवॉल निर्माण तक पहुंच गया है। एक ओर ग्रामीण दशकों पुराने सार्वजनिक रास्ते के इस्तेमाल का दावा कर रहे हैं, वहीं भू-स्वामी जमीन को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए पुराने सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड का हवाला दे रहे हैं।

ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और जोरा तालाब तक जाने वाला रास्ता राजस्व रिकॉर्ड में किस रूप में दर्ज है?

ग्रामीणों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष सीमांकन नहीं कराया गया और रास्ते का समाधान नहीं निकाला गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। अब पूरे मामले में प्रशासनिक और राजस्व जांच ही तस्वीर साफ करेगी।