भ्रष्टाचार मिटाने से नहीं, समृद्धि बढ़ाने से मिटेगा; पुरानी नैतिकता नहीं, नई सोच चाहिए, अच्छी बातें सुनने और पैर छूने से समाज नहीं बदलता “ओशो”

 भ्रष्टाचार मिटाने से नहीं, समृद्धि बढ़ाने से मिटेगा; पुरानी नैतिकता नहीं, नई सोच चाहिए, अच्छी बातें सुनने और पैर छूने से समाज नहीं बदलता “ओशो”

ओशो- अगर युवक ज्यादा देर तक अविवाहित रहें तो मैं यह नहीं कहता हूं कि वे ज्यादा देर तक वे बिना प्रेम के भी रहें। अविवाहित रह कर भी प्रेम किया जा सकता है। और मैं उन लोगों में से नहीं हूं, जो यह कहूं कि वे ब्रह्मचर्य धारण करके रहें। क्योंकि वह नासमझी की बात है। कभी लाख में एकाध आदमी उसे उपलब्ध हो सकता है। लेकिन आज तो साइंस ने इतने आर्टिफिशियल साधन उपलब्ध कर दिए हैं कि बिना बच्चे पैदा किए प्रेम किया जा सकता है। इसलिए उसमें बहुत घबड़ाने की जरूरत नहीं है, उसमें बहुत परेशान होने की जरूरत नहीं है।
दूसरी बात एक मित्र ने पूछी है कि करप्शन बढ़ गया है।
करप्शन बढ़ेगा। स्वाभाविक है। जहां लोग ज्यादा होंगे और जरूरत की चीजें कम होंगी, वहां करप्शन बढ़ेगा। इस करप्शन को मिटाने का उपाय करप्शन को मिटाना नहीं है, इस करप्शन को मिटाने का उपाय लोगों की जिंदगी में समृद्धि लाना है। और कोई रास्ता नहीं है। कोई दुनिया में आदमी बुरा नहीं होना चाहता, बुरा होना सिर्फ मजबूरी से संभव होता है। बुरा से बुरा आदमी भी मजबूरी का फल होता है।
अगर लोग चोर हैं, बेईमान हैं, रिश्वतखोर हैं, तो मजबूरियां उन्हें इन सब चीजों के लिए मजबूर कर रही हैं। इसलिए अगर हमने सोचा कि हम भ्रष्टाचार मिटाएंगे, करप्शन मिटाएंगे, तो सिर्फ बकवास चलेगी, कुछ मिटने वाला नहीं है।

अगर हम जिंदगी की असली बात को समझ लें कि चीजें कम हैं और लोग ज्यादा हैं। इसलिए भ्रष्टाचार स्वाभाविक है। तो भ्रष्टाचार को तो एक तरफ छोड़ो, चीजें बढ़ाने में लग जाओ। भ्रष्टाचार मिट जाएगा।
और उन मित्र ने कहा है कि इतने ज्यादा महात्मा हैं।
जहां भ्रष्टाचार ज्यादा होता है, महात्मा ज्यादा हो जाते हैं। असल में भ्रष्टाचारी समाज में महात्मा बढ़ जाते हैं। उसका कारण है। क्योंकि जहां बीमार ज्यादा होते हैं वहां डाक्टर बढ़ जाते हैं, जहां चोर-बेईमान ज्यादा होते हैं वहां उपदेशक बढ़ जाते हैं। ये प्रोफेशनल संबंध हैं इनके। अगर गांव में बीमार ज्यादा होंगे तो डाक्टर बढ़ जाएंगे। तो आप यह नहीं कह सकते कि गांव में इतने डाक्टर हैं तो बीमार ज्यादा क्यों हैं? बात उलटी है, गांव में इतने बीमार हैं इसलिए इतने डाक्टर हैं। इतने महात्मा हैं दुनिया में, इस मुल्क में इतने महात्मा हैं तो इतना करप्शन क्यों है? मैं कहता हूं बात उलटी है, इतना करप्शन है इसलिए इतने महात्मा हैं। नहीं तो इनको सुनेगा कौन?

जब मुल्क में अनैतिकता बढ़ती है, इम्मॉरेलिटी बढ़ती है तो प्रीचर्स बढ़ जाते हैं। स्वभावतः, क्योंकि वे समझाने लगते हैं कि नैतिक बनो! और नैतिक बनना आसान तो नहीं है, समझाने से तो होता नहीं। इसलिए महात्मा समझाए चला जाता है। और महात्मा अच्छी बातें समझाता है तो हम उसके पैर भी पड़ते हैं। हालांकि अच्छी बातों और पैर पड़ने से मुल्क नहीं बदलता।
इस मुल्क को महात्माओं की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। इस मुल्क में महात्मा न हों तो कुछ हर्जा न हो जाएगा। सिर्फ इतना फर्क पड़ेगा कि करप्शन के खिलाफ बोलने वाले लोग न होंगे। करप्शन तो इतना ही रहेगा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बोलने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। और ध्यान रहे, हमारे सब महात्मा एक अर्थ में आउट ऑफ डेट हैं। वह तीन-चार हजार साल पुरानी व्यवस्था उनके दिमाग में है। सारी दुनिया बदल गई है। वे जो समझा रहे हैं वह तीन-चार हजार साल पहले ठीक था, अब ठीक नहीं है। इसलिए हमारे महात्माओं का जवान से तो कोई संबंध नहीं रह गया। बूढ़े मरे हुए लोग उनके सुनते हैं, जिनका एक पैर कब्र में चला गया वे महात्माओं के पास होते हैं या बेपढ़ी-लिखी औरतें होती हैं।

हिंदुस्तान के जवान का तो महात्माओं से कोई संबंध नहीं है। हिंदुस्तान के जवान को तो कुछ नई तरह की व्यवस्था और चिंतन पैदा करना पड़ेगा और नये विचारक पैदा करना पड़ेंगे। हिंदुस्तान के जवान के योग्य महात्मा हिंदुस्तान के पास नहीं हैं। हिंदुस्तान के जवान के लिए वैज्ञानिक ढंग से सोचने वाले महात्मा चाहिए।

अब जैसे कि मैं यह बात कह रहा हूं, यह हिंदुस्तान में कोई साधु आपसे नहीं कह सकेगा। क्योंकि मैं जानता हूं कि ब्रह्मचर्य कभी लाख दो लाख में एक आदमी के लिए संभव है। और ज्यादा लोग अगर कोशिश करेंगे तो सिर्फ बीमार पड़ेंगे और व्यभिचारी हो जाएंगे, और कुछ भी नहीं हो सकता। या यह हो सकता है कि मेंटल सेक्सुअलिटी शुरू हो जाए, बॉडिली बंद हो जाए और दिमाग में शुरू हो जाए। जो और खतरनाक है।

तो मैं आपसे कहता हूं, शादी देर से करें, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आपका सेक्स स्टार्व हो। आपके सेक्स को भूखा रखने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन वह पुराने जमाने की बातें हो गईं कि सेक्स से बच्चा पैदा हो जाता था। अब तो कोई जरूरत नहीं। अब तो हमने सेक्स को री-प्रोडक्शन को अलग कर लिया है। सेक्स अलग चीज है, री-प्रोडक्शन अलग चीज है। और बहुत जल्दी, अभी तो हम बिना री-प्रोडक्शन के सेक्स में संबंधित हो सकते हैं, कल बिल्कुल ऐसी स्थिति आ जाएगी कि री-प्रोडक्शन के लिए सेक्स की बिल्कुल ही जरूरत नहीं रह जाएगी। करीब-करीब आ गई है। हम टेस्ट-ट्यूब में बच्चे को पैदा कर सकेंगे। बहुत दिन स्त्रियों को बच्चे को पेट में रखने की तकलीफ आगे नहीं झेलनी पड़ेगी।
इसलिए अब जो हमारी पुरानी सेक्सुअल मॉरेलिटी है, उसके बचाए रखने की कोई जरूरत नहीं, वह बिल्कुल बेकार है। अब तो भविष्य में जो मॉरेलिटी होगी हाइजनिक होगी, सेक्सुअल नहीं होगी। सेक्स का बड़ा सवाल नहीं है, हाइजिन का बड़ा सवाल है। यह बड़ा सवाल नहीं है कि आपका किस स्त्री से संबंध है, बड़ा सवाल यह है कि उस स्त्री से आपका प्रेम है या नहीं। पुरानी दुनिया बहुत प्रेमहीन दुनिया थी। नई दुनिया बहुत प्रेमपूर्ण हो सकेगी। और इसीलिए प्रेमपूर्ण हो सकेगी कि अब सेक्स को हमने बहुत से विभाजन कर दिए हैं।

क्रमशः…..15

ओशो आश्रम उम्दा रोड भिलाई-3