नींबू काटकर बारिश रोकने का सांसद भोजराज नाग ने किया दावा, मंच पर छूटे ठहाके; वीडियो वायरल

 नींबू काटकर बारिश रोकने का सांसद भोजराज नाग ने किया दावा, मंच पर छूटे ठहाके; वीडियो वायरल

राकेश कुमार की रिपोर्ट

डौंडीलोहारा। डौंडीलोहारा में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कांकेर लोकसभा क्षेत्र के भाजपा सांसद भोजराज नाग अपने एक बयान को लेकर चर्चा में आ गए। कार्यक्रम में संबोधन के दौरान सांसद ने बारिश रोकने के लिए नींबू काटने और देवी-देवताओं से प्रार्थना करने का दावा किया। सांसद के इस बयान के बाद मंच पर मौजूद जनप्रतिनिधियों के चेहरे पर मुस्कान नजर आई, वहीं कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच ठहाके भी गूंज उठे।दरअसल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय डौंडीलोहारा में आयोजित कार्यक्रम में महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त जारी करने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान आसमान में बादल छाए हुए थे और मौसम खराब होने के कारण बारिश की आशंका बनी हुई थी। इसी दौरान अपने संबोधन में सांसद भोजराज नाग ने मौसम का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने बूढ़ादेव और महादेव से प्रार्थना की और नींबू काटा, जिसके बाद बारिश रुक गई।सांसद ने अपने संबोधन में इस घटना को जिस अंदाज में प्रस्तुत किया, उससे कार्यक्रम का माहौल कुछ देर के लिए हल्का-फुल्का हो गया। मंच पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत मौजूद अन्य जनप्रतिनिधि भी मुस्कुराते दिखाई दिए। कार्यक्रम में बैठे लोगों की प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बन गई।

सांसद के इस बयान का वीडियो अब सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसके बाद इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। समर्थक जहां इसे सांसद की आस्था और विश्वास से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं विपक्षी नेताओं ने इसे लेकर सवाल और तंज कसना शुरू कर दिया है।

कांग्रेस ने साधा निशाना

सांसद के बयान पर कांग्रेस नेताओं ने भी कटाक्ष किया है। कांग्रेस की ओर से तंज कसते हुए कहा गया कि यदि नींबू काटने और प्रार्थना करने से बारिश रुक सकती है, तो इसी तरह महंगाई और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं के बढ़ते दाम भी कम कराए जा सकते हैं। कांग्रेस नेताओं ने सांसद के बयान को लेकर सरकार पर भी व्यंग्य किया और कहा कि जनता अब ऐसे दावों की वास्तविकता पर सवाल उठा रही है।फिलहाल सांसद भोजराज नाग का यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्यक्रम में बारिश को लेकर सांसद का दावा और उसके बाद मंच पर गूंजे ठहाके अब राजनीतिक बयानबाजी का भी हिस्सा बन गए हैं।