जगदलपुर केंद्रीय जेल में अनोखा विवाह: दुष्कर्म मामले के विचाराधीन बंदी ने शिकायतकर्ता युवती से लिए सात फेरे

 जगदलपुर केंद्रीय जेल में अनोखा विवाह: दुष्कर्म मामले के विचाराधीन बंदी ने शिकायतकर्ता युवती से लिए सात फेरे

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर केंद्रीय जेल में शुक्रवार को एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने सामान्य जेल व्यवस्था से अलग एक अनूठी मिसाल पेश की। आमतौर पर सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं के लिए पहचाने जाने वाले जेल परिसर में कुछ समय के लिए विवाह का माहौल बन गया। वैदिक मंत्रोच्चार, अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे और परिवार की सीमित मौजूदगी के बीच एक विचाराधीन बंदी ने उसी युवती से विवाह किया, जिसकी शिकायत पर उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था।

प्रेम संबंध से शुरू हुआ विवाद, अदालत तक पहुंचा मामला

जानकारी के अनुसार, परपा थाना क्षेत्र के राजूर गांव निवासी सुरेश सेठिया 16 जनवरी 2026 से दुष्कर्म के मामले में केंद्रीय जेल में विचाराधीन बंदी के रूप में निरुद्ध है।युवती की शिकायत के आधार पर उसके खिलाफ अपराध दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान परिस्थितियां बदलीं और दोनों पक्षों ने अदालत के समक्ष अपने संबंधों को लेकर नया पक्ष रखा।

युवती ने अदालत में विवाह की इच्छा जताई

सुनवाई के दौरान युवती ने विशेष सत्र न्यायालय (अत्याचार निवारण अधिनियम) के समक्ष बयान दिया कि वह और सुरेश लंबे समय से एक-दूसरे को जानते हैं तथा आपसी सहमति से विवाह करना चाहते थे।युवती के अनुसार, दोनों अलग-अलग जाति से होने के कारण परिवार इस रिश्ते के पक्ष में नहीं था और पारिवारिक दबाव के चलते उसने शिकायत दर्ज कराई थी।

दोनों के बालिग होने और विवाह के प्रति उनकी सहमति को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने विशेष अनुमति देते हुए जेल परिसर में विवाह संपन्न कराने का आदेश दिया।

कड़ी सुरक्षा के बीच पूरी हुई विवाह की रस्में

न्यायालय के निर्देश के बाद शुक्रवार को केंद्रीय जेल परिसर में सीमित संख्या में दोनों परिवारों के सदस्य, अधिवक्ता तथा जेल प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे। सुरक्षा व्यवस्था के बीच वैदिक रीति-रिवाज से विवाह की सभी रस्में पूरी कराई गईं। वरमाला से लेकर सात फेरों तक की सभी परंपराएं निर्धारित नियमों के अनुरूप संपन्न हुईं।

जेल प्रशासन ने नियमों के पालन की पुष्टि की

केंद्रीय जेल प्रशासन ने बताया कि विवाह की पूरी प्रक्रिया न्यायालय के आदेश और जेल नियमावली के अनुरूप कराई गई। विवाह के दौरान सुरक्षा और कानूनी औपचारिकताओं का विशेष ध्यान रखा गया, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।

विवाह के बावजूद जारी रहेगी न्यायिक प्रक्रिया

जेल अधीक्षक अक्षय तिवारी ने स्पष्ट किया कि विवाह संपन्न होने का दुष्कर्म मामले की कानूनी सुनवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और उसका अंतिम फैसला उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाएगा।