मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गनियारी में दी पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि, लोककला सम्मान और विद्यालय नामकरण की बड़ी घोषणा

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गनियारी में दी पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि, लोककला सम्मान और विद्यालय नामकरण की बड़ी घोषणा

दुर्ग। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने वाली प्रख्यात पंडवानी गायिका, पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई की दशगात्र एवं श्रद्धांजलि सभा सोमवार को उनके पैतृक ग्राम गनियारी (जिला दुर्ग) में भावपूर्ण वातावरण में आयोजित हुई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को अमर बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।मुख्यमंत्री श्री साय ने डॉ. तीजन बाई के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और कहा कि तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर थीं। उन्होंने पंडवानी कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति और महाभारत की लोक परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाई। उनके निधन से कला जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।

तीजन बाई की स्मृति में तीन बड़ी घोषणाएं

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार डॉ. तीजन बाई के योगदान को सदैव स्मरणीय बनाए रखने के लिए तीन महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है—

  • राज्योत्सव के अवसर पर प्रतिवर्ष “डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण” प्रदान किया जाएगा।
  • ग्राम गनियारी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण डॉ. तीजन बाई के नाम पर किया जाएगा।
  • उनके प्रिय तंबूरे को रायपुर संग्रहालय में सम्मानपूर्वक संरक्षित किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी कला साधना और विरासत से प्रेरणा प्राप्त कर सकें।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी जाना था स्वास्थ्य का हाल

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई के अस्वस्थ होने पर राज्य सरकार ने उनके उपचार के लिए हर संभव प्रयास किए थे। उन्होंने बताया कि राज्योत्सव के दौरान स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूरभाष के माध्यम से उनके परिजनों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना था। उनके निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित अनेक केंद्रीय मंत्रियों ने भी शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

लोककला की अमर पहचान थीं तीजन बाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत कला, सशक्त प्रस्तुति और संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं को विश्व के प्रतिष्ठित मंचों तक पहुंचाया। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगी।

परिजनों से मिले मुख्यमंत्री

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने डॉ. तीजन बाई के पुत्र दिलहरण पारधी सहित परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और उन्हें ढांढस बंधाया।

जनप्रतिनिधियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

सभा को सांसद विजय बघेल, पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल तथा विधायक एवं पद्मश्री अनुज शर्मा ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने डॉ. तीजन बाई के व्यक्तित्व, कृतित्व और लोककला के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

बड़ी संख्या में पहुंचे कलाकार और गणमान्यजन

श्रद्धांजलि सभा में पद्मश्री आर.एस. बारले, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, पूर्व विधायक लाभचंद बाफना, भिलाई-चरोदा नगर निगम के महापौर निर्मल कोसरे, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, जनपद पंचायत पाटन की अध्यक्ष कीर्ति नायक, संभागायुक्त एस.एन. राठौर, आईजी अभिषेक शांडिल्य, कलेक्टर अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कलाकार एवं प्रदेशभर से आए हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को अमर कर गईं तीजन बाई

पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली डॉ. तीजन बाई का जीवन लोककला, संघर्ष और समर्पण का अद्भुत उदाहरण रहा। गनियारी में आयोजित श्रद्धांजलि सभा ने यह स्पष्ट कर दिया कि छत्तीसगढ़ की यह महान लोक कलाकार भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कला और विरासत आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।